Thursday, 4 October 2012
कंडोम को बढ़ावा देने के लिए 'सेक्स आवर'
अध्ययन के मुताबिक 20 से 35 वर्ष की उम्र
के 62 फीसदी नॉर्वे के पुरूषों ने पिछली बार जब अचानक सेक्स किया तो
उन्होंने कंडोम का इस्तेमाल नहीं किया। नॉर्वे में हर साल क्लामीडिया के 20
हजार मामले सामने आते हैं।आरएफएसयू की सेक्सोलोजिस्ट सिदसेल
क्लोईव कहती हैं कि हमारा नारा है कि सेक्स अच्छा है, इससे आपकी सेहत
सुधरती है। उनका कहना है कि सेक्स आवर नॉर्वे में इस साल का सबसे आनंददायक
घंटा होगा।
80 साल की बुजुर्ग महिला के साथ यौन दुराचार
80 साल की
बुजुर्ग महिला के साथ यौन
दुराचार
नई दिल्ली: उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में पिछले साल 80 साल की बुजुर्ग महिला के साथ पार्क में करीब एक घंटे तक लकड़ी की छड़ी से यौन दुराचार के मामले से रेप की परिभाषा पर फिर से विचार करने का मुद्दा एक बार फिर उठा है। दिल दहला देने वाले इस मामले में कानूनी बाध्यताओं के चलते आरोपी युवक को आईपीसी की धारा -377 के तहत सिर्फ अप्राकृतिक दुराचार का दोषी ठहराया गया।
फैसला सुनाने के दौरान अडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ ने सरकार से रेप की परिभाषा बदलकर इसका दायरा बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल आईपीसी के सेक्शन 375 के अनुसार महिला की मर्जी के बिना उससे शारीरिक संबंध बनाने (सेक्शुअल ऑर्गन के पेनट्रेशन) को रेप माना जाता है।
मई
2011 में उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के त्रि नगर इलाके में कई सालों से पार्क
में रह रही 80 साल की बुजुर्ग महिला के साथ एक युवक ने दुराचार किया था। इस
मामले में पुलिस ने प्रह्लाद नाम के युवक को गिरफ्तार किया था।
अडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ की अदालत ने इस केस का जिक्र करते हुए कहा, ' यह एक बर्बर अपराध है, अपनी यौन उत्कंठा की पूर्ति के लिए पीड़िता के साथ जानवरों जैसा सलूक किया गया। ' सेशन कोर्ट ने कानून के जानकारों से कहा कि डिजिटल रेप, ओरल रेप, मेल रेप और ऐनल सेक्स को रेप की परिभाषा में शामिल करने पर विचार करने के लिए कहा। अदालत ने कहा इस केस ने हमारी आंखें खोलकर रख दी हैं।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही योजना आयोग की समिति ने क्रिमिनल प्रोसिजर कोड को महिलाओं के लिए और आसान बनाए जाने की बात कही है। रेप की नई परिभाषा में सेक्सुअल पेनेट्रेशन में सेक्सुअल अंग के अलावा अंगुली डालना भी शामिल हो जाएगा। इसके बाद रेप की पुष्टि के लिए किए जाने वाले फिंगर टेस्ट को भी अपराध माना जाएगा, अगर वह पीड़ित से पूछे बिना किया जाता है। योजना आयोग की एक उच्च स्तरीय समिति ने रेप की शिकार हुई महिलाओं और बच्चों को और अधिक मानसिक प्रताड़ना से बचाने के लिए सुझाव दिया है कि रेप और यौन संबंध की पुष्टि के लिए किया जानेवाला उंगली परीक्षण (टू फिंगर टेस्ट) खत्म कर दिया जाए।
सेशन कोर्ट ने रेप की परिभाषा बदलने पर पुनर्विचार करने का मुद्दा इसलिए उठाया कि त्रीनगर रेप मामले में आरोपी प्रहलाद को अप्राकृतिक दुराचार, किडनैंपिग और हत्या के प्रयास का दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा दी गई और 17 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
पुलिस के मुताबिक, इस केस में बुजुर्ग पीड़िता घर-परिवार होने के बावजूद पार्क में रहने के लिए मजबूर थी क्योंकि बेटे और बहुएं उसे अपने साथ घर में नहीं रखते थे। पीड़िता खाने के लिए पार्क के आसपास रहने वाले लोगों की दया पर निर्भर थी। 22 मई 2011 को आधी रात करीब 2 बजे प्रह्लाद बुजुर्ग महिला को पास की झाड़ियों में घसीट कर ले गया और उसने लकड़ी की छड़ी से उसके साथ दुराचार किया। इसके बाद वह वहां से भाग गया। बाद में वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने महिला को अचेत और खून से लथपथ हालत में देखकर पास के हॉस्पिटल में भर्ती कराया और पुलिस को सूचित किया। होश में आने के बाद पीड़िता ने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। इस मामले में पुलिस ने 6 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया। परेड के दौरान महिला ने प्रह्लाद की शिनाख्त की।
कोर्ट में केस के ट्रायल के दौरान दिल्ली महिला आयोग के एक एडवोकेट ने यह कहा कि महिला को रेप पीड़ित के समान माना जाए। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान कानून इस बात की इजाजत नहीं देते, लेकिन कोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े कानूनी जानकारों से इस पर पुनर्विचार करने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा, 'रेप की परिभाषा का दायरा बढ़ाना आज वक्त की जरूरत है। आज जब छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ इस तरह के अपराध किए जा रहे हैं, तो अब वक्त है कि इस पर गंभीरता से विचार किया जाए।'
नई दिल्ली: उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में पिछले साल 80 साल की बुजुर्ग महिला के साथ पार्क में करीब एक घंटे तक लकड़ी की छड़ी से यौन दुराचार के मामले से रेप की परिभाषा पर फिर से विचार करने का मुद्दा एक बार फिर उठा है। दिल दहला देने वाले इस मामले में कानूनी बाध्यताओं के चलते आरोपी युवक को आईपीसी की धारा -377 के तहत सिर्फ अप्राकृतिक दुराचार का दोषी ठहराया गया।
फैसला सुनाने के दौरान अडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ ने सरकार से रेप की परिभाषा बदलकर इसका दायरा बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल आईपीसी के सेक्शन 375 के अनुसार महिला की मर्जी के बिना उससे शारीरिक संबंध बनाने (सेक्शुअल ऑर्गन के पेनट्रेशन) को रेप माना जाता है।
मई
2011 में उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के त्रि नगर इलाके में कई सालों से पार्क
में रह रही 80 साल की बुजुर्ग महिला के साथ एक युवक ने दुराचार किया था। इस
मामले में पुलिस ने प्रह्लाद नाम के युवक को गिरफ्तार किया था।अडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ की अदालत ने इस केस का जिक्र करते हुए कहा, ' यह एक बर्बर अपराध है, अपनी यौन उत्कंठा की पूर्ति के लिए पीड़िता के साथ जानवरों जैसा सलूक किया गया। ' सेशन कोर्ट ने कानून के जानकारों से कहा कि डिजिटल रेप, ओरल रेप, मेल रेप और ऐनल सेक्स को रेप की परिभाषा में शामिल करने पर विचार करने के लिए कहा। अदालत ने कहा इस केस ने हमारी आंखें खोलकर रख दी हैं।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही योजना आयोग की समिति ने क्रिमिनल प्रोसिजर कोड को महिलाओं के लिए और आसान बनाए जाने की बात कही है। रेप की नई परिभाषा में सेक्सुअल पेनेट्रेशन में सेक्सुअल अंग के अलावा अंगुली डालना भी शामिल हो जाएगा। इसके बाद रेप की पुष्टि के लिए किए जाने वाले फिंगर टेस्ट को भी अपराध माना जाएगा, अगर वह पीड़ित से पूछे बिना किया जाता है। योजना आयोग की एक उच्च स्तरीय समिति ने रेप की शिकार हुई महिलाओं और बच्चों को और अधिक मानसिक प्रताड़ना से बचाने के लिए सुझाव दिया है कि रेप और यौन संबंध की पुष्टि के लिए किया जानेवाला उंगली परीक्षण (टू फिंगर टेस्ट) खत्म कर दिया जाए।
सेशन कोर्ट ने रेप की परिभाषा बदलने पर पुनर्विचार करने का मुद्दा इसलिए उठाया कि त्रीनगर रेप मामले में आरोपी प्रहलाद को अप्राकृतिक दुराचार, किडनैंपिग और हत्या के प्रयास का दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा दी गई और 17 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
पुलिस के मुताबिक, इस केस में बुजुर्ग पीड़िता घर-परिवार होने के बावजूद पार्क में रहने के लिए मजबूर थी क्योंकि बेटे और बहुएं उसे अपने साथ घर में नहीं रखते थे। पीड़िता खाने के लिए पार्क के आसपास रहने वाले लोगों की दया पर निर्भर थी। 22 मई 2011 को आधी रात करीब 2 बजे प्रह्लाद बुजुर्ग महिला को पास की झाड़ियों में घसीट कर ले गया और उसने लकड़ी की छड़ी से उसके साथ दुराचार किया। इसके बाद वह वहां से भाग गया। बाद में वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने महिला को अचेत और खून से लथपथ हालत में देखकर पास के हॉस्पिटल में भर्ती कराया और पुलिस को सूचित किया। होश में आने के बाद पीड़िता ने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। इस मामले में पुलिस ने 6 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया। परेड के दौरान महिला ने प्रह्लाद की शिनाख्त की।
कोर्ट में केस के ट्रायल के दौरान दिल्ली महिला आयोग के एक एडवोकेट ने यह कहा कि महिला को रेप पीड़ित के समान माना जाए। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान कानून इस बात की इजाजत नहीं देते, लेकिन कोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े कानूनी जानकारों से इस पर पुनर्विचार करने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा, 'रेप की परिभाषा का दायरा बढ़ाना आज वक्त की जरूरत है। आज जब छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ इस तरह के अपराध किए जा रहे हैं, तो अब वक्त है कि इस पर गंभीरता से विचार किया जाए।'
कार के साथ बनाता है यौन संबंध
कार के साथ बनाता है यौन संबंध
दुनिया लोगों को कई तरह के शौक होते हैं। जब ये शौक
जूनून बन जाता है तो उन्हें रोकना बहुत मुश्किल हो जाता है। एक शक्स को कुछ
ऎसा ही शौक है।
अरंकसास निवासी नैथेनियल को अपनी कार से बहुत प्यार है। वह अपनी कार को इतना पसंद करता है कि वह उसे अपनी पत्नी की तरह रखता है।इतना ही नहीं वह अपनी कार के साथ सेक्स भी करता है। नैथेनियल पिछले पांच सालों से अपनी कार के साथ सेक्स कर रहा है।वह अपनी कार के साथ डेटिंग पर भी जाता है। इतना ही नहीं वह उसके जन्मदिन
पर उसे गिफ्ट भी देता है। अब आप इसे शौक कहेंगे, जूनून कहेंगे या पागलपन.
शादीशुदा जिंदगी में संबंध बनाने से मना करना गलत....
शादीशुदा जिंदगी में संबंध बनाने से मना करना गलत....
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसी महिला की तलाक की याचिका कबूल कर ली है जिसके पति ने यह कहते हुए यौन संबंध बनाने से इनकार कर दिया था कि पहले वह अपनी शैक्षणिक योग्यता और नौकरी को साबित करे।
कोर्ट ने माना है कि शादीशुदा जिंदगी में सामान्य शारीरिक संबंध बनाने से मना करना बिल्कुल गलत है। शादीशुदा जिंदगी में पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध बहुत मायने रखते हैं और दोनों में से किसी के भी द्वारा इससे इनकार करना दूसरे पर प्रताड़ना है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने इसी टिप्पणी के साथ उस महिला की तलाक की याचिका कबूल कर ली।याचिकाकर्ता महिला ने शादी से पहले दिए गए अपने बायोडाटा में खुद के नौकरी में होने की बात कही थी, जबकि वह नौकरी नहीं करती थी। इसके बाद पति ने उसके साथ यौन संबंध बनाना छोड़ दिया। इसी को आधार बनाकर महिला ने निचली अदालत से तलाक ले लिया था।
मामला हाईकोर्ट में आने पर न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और कहा कि शारीरिक संबंध बनाने से पहले शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र पेश करने की शर्त रखना निश्चित रूप से नृशंसता और क्रूरता है और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत यह तलाक के आधारों में से एक है।हाईकोर्ट में महिला के पति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उसने शादी के लिए अखबार में विज्ञापन दिया था। जिसके जवाब में महिला ने खुद के नौकरी में होने का दावा किया था। सुहागरात को दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बने थे, लेकिन इसके बाद पति ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। पति का कहना था कि शादी से पहले उसकी पत्नी नौकरी नहीं करती थी।
कई बार उसने शैक्षिक योग्यता के सर्टिफिकेट दिखाने के लिए भी कहा, लेकिन उसने सर्टिफिकेट नहीं दिखाया। पति का कहना था कि शहर में सहज जीवन-यापन करने के लिए उसे कामकाजी महिला की जरूरत थी। न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने अपने आदेश में कहा है कि पति ने इस पवित्र रिश्ते को सामान खरीद-फरोख्त का सिस्टम बना दिया है। पति ने पत्नी की नौकरी को ज्यादा तवज्जो दी।
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐसी महिला की तलाक की याचिका कबूल कर ली है जिसके पति ने यह कहते हुए यौन संबंध बनाने से इनकार कर दिया था कि पहले वह अपनी शैक्षणिक योग्यता और नौकरी को साबित करे।
कोर्ट ने माना है कि शादीशुदा जिंदगी में सामान्य शारीरिक संबंध बनाने से मना करना बिल्कुल गलत है। शादीशुदा जिंदगी में पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध बहुत मायने रखते हैं और दोनों में से किसी के भी द्वारा इससे इनकार करना दूसरे पर प्रताड़ना है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने इसी टिप्पणी के साथ उस महिला की तलाक की याचिका कबूल कर ली।याचिकाकर्ता महिला ने शादी से पहले दिए गए अपने बायोडाटा में खुद के नौकरी में होने की बात कही थी, जबकि वह नौकरी नहीं करती थी। इसके बाद पति ने उसके साथ यौन संबंध बनाना छोड़ दिया। इसी को आधार बनाकर महिला ने निचली अदालत से तलाक ले लिया था।
मामला हाईकोर्ट में आने पर न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और कहा कि शारीरिक संबंध बनाने से पहले शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र पेश करने की शर्त रखना निश्चित रूप से नृशंसता और क्रूरता है और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत यह तलाक के आधारों में से एक है।हाईकोर्ट में महिला के पति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उसने शादी के लिए अखबार में विज्ञापन दिया था। जिसके जवाब में महिला ने खुद के नौकरी में होने का दावा किया था। सुहागरात को दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बने थे, लेकिन इसके बाद पति ने ऐसा करने से इन्कार कर दिया। पति का कहना था कि शादी से पहले उसकी पत्नी नौकरी नहीं करती थी।
कई बार उसने शैक्षिक योग्यता के सर्टिफिकेट दिखाने के लिए भी कहा, लेकिन उसने सर्टिफिकेट नहीं दिखाया। पति का कहना था कि शहर में सहज जीवन-यापन करने के लिए उसे कामकाजी महिला की जरूरत थी। न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने अपने आदेश में कहा है कि पति ने इस पवित्र रिश्ते को सामान खरीद-फरोख्त का सिस्टम बना दिया है। पति ने पत्नी की नौकरी को ज्यादा तवज्जो दी।
Wednesday, 3 October 2012
कंडोम से सेक्स का मज़ा कम नहीं होता
कंडोम से सेक्स का मज़ा कम नहीं होता
यदि आपको लगता है की कंडोम से सेक्स का मज़ा कम हो जाता है तो आपको जानकर ख़ुशी होगी कि कंडोम के साथ भी सेक्स का लुत्फ़ कम नहीं होता।
यदि किसी पुरुष को सेक्स के अलावा दूसरे तरीके से उत्तेजित किया जाये, जैसे की मुखमैथुन और हस्तमैथुन, तो उसके लिए इसके बाद का कंडोम के साथ का सेक्स आनंदमयी बन जाता है। इस तथ्य की पुष्ठी एक अध्यन में भी हुई है।
Saturday, 29 September 2012
आपकी सेक्स लाइफ पर भी असर डालते हैं दीवारों के रंग!
आपकी सेक्स लाइफ पर भी असर डालते हैं दीवारों के रंग!
क्या आप बेडरूम पेंट करवाने की सोच रहे हैं? अगर हां, तो एक नए सर्वे के रिजल्ट्स पर गौर जरुर फरमाइए। इस सर्वे के मुताबिक बेडरूम के लिए पर्पल कलर सबसे बेहतर होता है। रिसर्च में पाया गया है कि, जिन कपल्स के बेडरूम का कलर पर्पल होता है, उनकी सेक्स लाइफ काफी बेहतर होती है।
लगभग 2 हजार कपल्स पर किए गए इस सर्वे में यह बात भी सामने आई कि सिल्क की चादरों पर सोने वालों की सेक्स लाइफ कॉटन की चादरों पर सोने वालों से ज्यादा अच्छी होती है। कहा गया है कि पर्पल दीवारें, सिल्क की चादर और पर्पल रजाई सबसे सेक्सी कॉम्बिनेशन है। इसका इस्तेमाल करके अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाया जा सकता है।
इस उम्र में आकर आंटियां भी खूब मचाती हैं सेक्स में गदर
इस उम्र में आकर आंटियां भी खूब मचाती हैं सेक्स में गदर
आज जहां बडी़ संख्या में पुरूष और महिलाएं सेक्स के ज्ञान की कमी से जूझ
रहे हैं, जिसकी वजह से सेक्स उनके लिए टैबू बन चुका है, लेकिन अमेरिका के
अधेड़ उम्र के व्यक्तियों का मानना है उन्हें सेक्स से जुड़ी सभी तरह की
जानकारी है और कुछ भी ऐसा नहीं है, जो उन्हें मालूम न हो। जबकि अधेड़
महिलाएँ तो सेक्स ज्ञान के मामले में खुद को मर्दों से दस कदम आगे ही समझती
हैं।
एसोसिएटेड प्रेस और वेबसाइट लाइफगोजस्ट्रांक के एक
सर्वे में यह दिलचस्प नतीजे सामने आए। 45 से 65 साल की 59 फीसदी महिलाओं का
मानना है कि वे सेक्स के बारे में सब कुछ जानती हैं, जबकि इस स्तर का
आत्मविश्वास केवल 48 फीसदी मर्दों में पाया गया। यानी आंटियां अंकलों के
मुकाबले सेक्स में माहिर होती हैं।
इंडियाना विश्वविद्यालय
के यौन स्वास्थ्य प्रोत्साहन केंद्र के डेबी हेरबेनिक ने बताया कि सेक्स के
बारे में महिलाएं अपने दोस्तों से मर्दों की तुलना में ज्यादा बात करती
हैं। वे कांउसलर या थैरेपिस्ट के पास भी ज्यादा जाती हैं।
सर्वे में पाया गया कि 45 से 55 साल की उम्र वाले करीब आधे मर्दों ने
शिकायत की कि उनके पार्टनर सेक्स को लेकर उतने उत्साहित नहीं रहते जितना वे
रहते हैं। 13 फीसदी महिलाओं ने भी यही शिकायत की। सर्वे में पाया गया कि
अधेड़ उम्र की 21 फीसदी महिलाएँ और 28 फीसदी मर्द अपने सेक्स जीवन से
असंतुष्ट रहते हैं।क्यों आकर्षित करते हैं स्तन पुरूषों को?
क्यों आकर्षित करते हैं स्तन पुरूषों को?
क्या कारण है कि पुरूष महिलाओं के स्तनों की ओर ज़्यादा आकर्षित होते हैं ?एक किताब के लेखक का अनुमान है कि इसके पीछे जैविक, सांस्कृतिक और सबसे ज़रूरी नर्सिंग यानी परिचर्या के दौरान स्त्रावित हार्मोन हो सकते हैं।
लैरी यंग और ब्रायन एलेक्जेंडर की किताब ‘कैमिस्ट्री बिटवीन अस: लव, सैक्स
और साइंस ऑफ अट्रेक्शन’ में इसका प्रमुख कारण बताया गया है नर्सिंग के
दौरान पैदा हुए हार्मोन।
डेली मेल में छपी इस खबर के मुताबिक नर्सिंग के दौरान निकलने वाला हार्मोन मां और बेटे के बीच एक गहरा नाता जोड़ता है और यहीं हार्मोन मिलन के दौरान प्रेमियों को भी करीब लाता है।
लैरी यंग कहते हैं कि “धरती पर मौजूद सारे स्तनपाईयों में से एक आदमी ही ऐसा है जो मिलन के दौरान स्तनों के प्रति आकर्षित होता है।“
लैरी के अनुसार “महिलाएं ही इनमें ऐसी जीव हैं जिनके स्तन यौवन अवस्था के
दौरान बढ़ते हैं। इसके अलावा आदमी ही एक मात्र प्राणी है जो मिलन के दौरान
स्तनों को दुलारते और चूमते हैं।”
इन लेखकों के मुताबिक पिछले 1 लाख सालों का इतिहास गवाह है कि पुरूष स्तनों
की ओर हमेशा से खिचे जाते हैं। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि यह आकर्षण
प्राकृतिक है पारंपरिक नहीं। किताब का एक हिस्सा कहता है कि ‘बच्चे खेल के
मैदान में स्तनों की ओर झुकना नहीं सीखते ये तो उनके दिमाग में गहरा समाया
एक जैविक सच है।’ पिता ने जन्म दिया तीन बच्चों को
पिता ने जन्म दिया तीन बच्चों को
अमेरिका:
आज तक मां ही अपने गर्भ से बच्चे को जन्म देती आई है, लेकिन यहां एक पिता
ने ही तीन बच्चों को जन्म दिया। यह कहानी नहीं बल्कि वास्तविकता है।
अमेरिका में फिनिक्स के रहने वाले 38 वर्षीय थामस ने अपने गर्भ से तीन
बच्चों को जन्म दिया है।
आंकडों के अनुसार पूरी दुनिया में पांच मेल मदर हैं, लेकिन प्रेगनेंसी से
लेकर बच्चे को जन्म देने तक होने वाली सारी प्रक्रिया को कैमरे के सामने
करने वाले थामस पहले मेल मदर हैं।
थामस ने लड़की के रूप में जन्म लिया था, लेकिन उसकी इच्छा लडका बनने की थी।
इसी कारण उन्होने 20 साल की उम्र मे अपना सेक्स बदलवा लिया। जिससे वो लडका
बन गए। इसके बाद उन्होंने नैंसी नाम की लडकी से शादी भी की। लेकिन मां
बनने की इच्छा उनमें अभी भी थी जिस कारण उन्होने अपने रिप्रोडक्टिव आर्गन्स
को नहीं हटवाया और उन्हें जेनेटिकली मां बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
किसी अज्ञात डोनर व्यक्ति के स्पर्म की सहायता से उन्होंने सुजैन, जेनसेन
और आस्टिन नाम के 3 बच्चों को जन्म दिया।
वह अपने बच्चों को कहानियां सुनाते है और उन्हें बतातें हैं कि वो इस
दुनिया में कैसे आए। थामस उन्हें अपनी प्रेगनेंसी की फोटो भी दिखाते है कि
किस तरह से वो उनके पेट में थे।
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