Wednesday, 21 November 2012

सेक्स आमंत्रण की 4 चिंगारियां

सेक्स आमंत्रण की 4 चिंगारियां

बेहतरीन रतिक्रिया के मामले में महिलाएं निम्न सेक्सी आमंत्रण और तकनीकि का नए अनुभव व सनसनी के लिये प्रयोग कर सकती हैं.जिंदादिल और संवेदनशील ऐसे युगलों के लिए जो एक दूसरे की सेक्सुअलिटी को शेयर करना चाहते हैं उनके लिये सेक्स क्रिया को अतिआनंददायी बनाने के कई तरीके हैं.

वह महिला जो अपने पति/पार्टनर को खुश करना चाहती है तो इसके लिये उसे पार्टनर के गुप्तांगों पर ध्यान केन्द्रित करना होगा. खुद महिला द्वारा सेक्स का प्रस्ताव रखना ही सेक्स क्रिया का सबसे बड़ा उकसावा है. यहीं से फोरप्ले की क्रिया आरंभ हो जाती है. इसके बाद उसकी उत्तेजना बढ़ाने के लिये आप अपने हाथों, मुख, योनि सहित कई अन्य अंगों व तरीकों का उपयोग कर सकती हैं.

 

ये सभी तरीके पुरुष के गुप्तांगों को उकसाने के लिये हैं. इनमें हाथों का प्रयोग सबसे बेहतर है क्योंकि इसमें काफी संभावनाएं हैं. कुछ महिलाएं अपने पार्टनर का लिंग अपने हाथ में लेना काफी पसंद करती हैं. फिर वे उसे उस सीमा तक उत्तेजित करती है जहां तक हो सकता है. लेकिन यह उनके पकड़ने के तरीके और उनके रिश्ते की साझेदारी पर निर्भर करता है.
सबसे आसान चीज जो आप अपने हाथों से कर सकती हैं वह है उसके लिंग को संभालना. यह फोरप्ले के दौरान आनंदानुभूति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. लेकिन जब आप बिस्तर पर या सेक्स पर न हो तो यह एक शक्तिबर्धक का काम करता है. उसके लिंग को दिन के अलग अलग समय पर छेड़ा जा सकता है. लेकिन जब आप किचन में हों या फिर टेलीविजन देख रहीं हो तब की छेड़छाड़ उसे काफी एग्रेसिव कर सकती है. इसके अलावा आप अपने घरेलू और सामाजिक माहौल के अनुरूप भी अपना समय व अवस्था निर्धारित कर सकती हैं. 

 देखे और सीखें

एक पुरुष चाहता है कि उसके लिंग का वैसा ही आलिंगन हो जैसा वह स्वयं हस्तमैथुन के दौरान करता है. इस लिए जरूरी है कि जब वह हस्तमैथुन करें या फिर स्वयं अपने लिंग को पकड़े तो उसके तौर तरीकों को गौर से देखें और जाने कि वास्तव में उसे किस तरीके से ज्यादा आनंद की अनुभूति होती है.

जब आप उसके लिंग को सहला या हिला रही हों तो इस बात पर गौर करें कि आपके किस तरीके से उसके चेहरे पर आनंद की अनुभूति ज्यादा दिखती है. यहां यह सिर्फ लिंग थामने का मामला भर नहीं है यहां लिंग से खिलवाड़ करके आनंद और उत्तेजना को जगाने का मामला है. उत्तेजना की शुरूआत के लिए लिंग को उसके पिछले हिस्से को हल्के हाथों से सहलाते हुए रगड़े . जैसे ही उत्तेजना शुरू हो जाती है तरीके बदलाव लाए. इससे नवीनता के साथ एक नया अनुभव मिलेगा. इसके अलावा वृषण और गुदाद्वार के बीच का क्षेत्र जो पेरिनियम के नाम से जाना जाता है- यह भी उत्तेजना को लेकर काफी संवेदनशील होता है- इसे भी सहलाया जा सकता है. कई पुरुष यहां से उत्तेजना की प्राप्ति काफी पसंद करते हैं, और इस उत्तेजना के कई तरीके हैं.

उसके लिंग की उत्तेजना के पश्चात अपना ध्यान उसके अण्डकोष की ओर ले जाएं. अपने हाथों को कप का आकार देकर उसके अण्डकोश को अपनी हथेलियों में भर लें, फिर एकदम हल्के दबाव के साथ उसे सहलाएं. वह इसकी शुरूआत के साथ ही आनंद लेना शुरू कर देगा लेकिन अत्यंत कम दबाव के बीच ही. इस तरह से वह काफी उत्तेजित होगा और काफी कड़ा होकर आपकी प्रतीक्षा करेगा.
कुछ पुरुष गुदा उत्तेजना(anal stimulation) पसंद करते हैं. इसके लिये उनके गुदा द्वार में उंगलियां फेर कर उत्तेजना प्रदान की जा सकती है. ऐसे में चाहें तो उसके गुदा द्वार पर उंगली का थोड़ा सा भाग घुसा कर तीव्र उत्तेजना प्रदान कर सकते हैं. (यह प्रक्रिया बहुत ही कम पुरुष ही पसंद करते हैं, हालांकि आज कर ऐसे पुरुषों की संख्या बढ़ती जा रही है). गुदा से संबंधी किसी भी प्रक्रिया के पूर्व यह जरूरी है कि इसकी शुरुआत के पहले ही इस क्षेत्र को अच्छे तरीके से साफ सुथरा किया जा चुका हो. इसका एक और आनंददायी तरीका यह भी हो सकता है कि जब वह फव्वारे में हो तो आप भी उसके साथ हों.

उसको हाथों की सहायता से उत्तेजित करने के पूर्व यह जरूर ध्यान में रखें कि आपकी हथेलियों में कोई स्निग्ध या चिकना द्रव्य जरूर लगा हो. अन्यथा कई बार यह पुरुषों के लिये कष्ट देने वाला काम भी साबित हो जाता है. इसके बाद अपने पति/पार्टनर को फोर प्ले के रूप में हस्तमैथुन का एक नया आनंद दें लेकिन यहां यह सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात है कि यह क्रिया शुरू करने के पहले अपने हाथों की सफाई जरूर कर लें.
मुंह का प्रयोग करें
मुख मैथुन किसी पुरुष के लिये अत्यंत आनंददायक अनुभूति होती है. कई बार यह क्रिया पुरुषों को यह संदेश काफी तेजी से देती है कि सेक्स क्रिया का यह महत्वपूर्ण हिस्सा है. क्योंकि मुंह कुछ मामलों में योनि के सदृश्यहै. बल्कि कई मामलों में यह योनि से बेहतर है. योनि में जीभ नहीं होती है. इस लिये मुख मैथुन के दौरान जीभ के प्रयोग से किसी पुरूष को और ज्यादा आनंद पहुंचाया जा सकता है. अब आप इस दौरान यह देख सकती है कि किस तरीके में उसे ज्यादा आनंद आता है. इसके अलावा आप स्वयं उससे पूछ सकती हैं कि मुख मैथुन के दौरान उसे किस तरीके में ज्यादा आनंद की अनुभूति होती है.

 इसके पश्चात आप उसके लिंग को चूमना और चूसना शुरू करें. इस क्रिया में आप चाहे तो और परिवर्तन कर सकते हैं. आप उसके लिंग में शहद या इस जैसा कुछ लगा दें फिर कुछ मिनट इसे चाटने में लगाएं. यह उसके लिये अब तक की सबसे अलग अनुभूति होगी. इसी तरह के कई तरीके आप खुद बना कर सेक्स पूर्व क्रिया(fore play) को आनंददायी और उत्तेजक बना सकती हैं .
जब कोई महिला अपने भग क्षेत्र से उसके लिंग को रगड़ती है तो पुरुषों को काफी आनंदानुभूति होती है
योनि का प्रयोग करें
अपने पति/पार्टनर को योनि की सहायता से उत्तेजित करने के कई तरीके हैं. इसके लिये जब वह अपने कूल्हों के बल लेटा हुआ हो तो सबसे पहले आप अपने भग क्षेत्र(vulva) से उसके लिंग को उपर नीचे करते हुए रगड़ें. फिर अपने अपने भग क्षेत्र को थोड़ा खोलते हुए इनर लिप्स की सहायता से उसके लिंग का मसाज करें. इससे उसके साथ-साथ आपको को भी बेहतर अनुभव होगा.
फिर उसके लिंग के थोड़े से भाग को अपनी योनि में डुबा कर(ज्यादा अंदर नहीं) हल्के से घुमाए(इस दौरान घुमाने का अंदाज ऐसा रखें जैसे कुछ खरोंच रहें हों) फिर बाहर आ जाएं. इसके बाद फिर उसके एकदम उपर बैठे और उसके शिश्न मुण्ड पर अपना योनिद्वार रख दें और हल्के से दबाएं.
यदि आप पुरुष को मदमस्त करना चाहती है तो उसके चेहरे पर अपने योनि से चुंबन दें. इस दौरान आप अपने हाथों और घुटनों का प्रयोग इस दौरान उसे बांधे रखने के लिये कर सकती हैं. इस दौरान आप इस तरीके से उसे जकड़े हुए अपनी योनि उसके लिंग से रगड़ते हुए उपर की ओर बढ़ें और चेहरे के पास ले जाकर थोड़ा उपर उठ जाएं. ताकि वह आपकी हल्की खुली योनि को देख सके. 

फिर बीच-बीच में योनि को चेहरे से छुलाते रहे साथ ही कभी कभी रगड़ें भी. इस दौरान यह ध्यान में रखें कि आपकी योनि इस क्रिया के पहले साफ सुथरी और धुली होनी चाहिए. इस तरीके से पुरुषों में तीव्र उत्तेजना का संचार होता है. इस उत्तेजना के बाद वह आप पर छा जाना चाहेगा. इस जैसे और भी तरीके हैं जो आप स्वयं बना सकती हैं लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि आप दोनो उन तरीकों को पसंद करें. इसीलिये कहा जाता है कि प्यार करने वाला जोड़ा हमेशा लचीला होता है.
कुछ सावधानियां
उत्तेजना के दौरान कभी लिंग को नीचे की ओर तेजी से नहीं ले जाना चाहिए. इससे रक्त संचार करने वाली शिराओं में प्रभाव पड़ता है साथ ही यूरेनरी सिस्टम पर भी कई विपरीत प्रभाव पड़ते हैं.
लिंग में कभी भी कुछ न फंसाएं. कई व्यक्तियों को उत्तेजना के दौरान लिंग में कुछ फंसाना अच्छा लगता है. कई बार यह काफी खतरनाक हो सकता है. कई बार यही चीजें इतने खतरनाक तरीके से फंस सकती हैं कि इन्हें निकालना काफी कठिन हो सकता है.

जब आप सर्दी जुखाम या किसी संक्रामक रोग से ग्रस्त हो या फिर आपको कोई संक्रमण हो तो इस दौरान उसके लिंग को न चूमें न ही छुए. ठीक यही तरीका तब भी करें जब उसके लिंग में कोई संक्रमण हो.
खेल-खेल में ही लिंग को कभी दांतों से नहीं काटे. यह पूर्णतः रक्त और रक्त नलिकाओं से भरा होता है, विशेषतः उत्तेजित अवस्था में.
पुरुष हस्तमैथुन के बेहतर तरीके
नब्बे फीसदी पुरुष शादी से पहले अक्सर हस्तमैथुन करते हैं. उत्तेजना शांत करने का पुरुषों के बीच हस्तमैथुन बेहतर साधन है. इनमें से 60 फीसदी तो ऐसे हैं जो सप्ताह में दो या दो से ज्यादा बार हस्तमैथुन करते हैं. लेकिन इस अप्राकृतिक मैथुन के बारे क्या होती है उनकी सोच… इनमें से ज्यादातर का मानना है कि यह सूखा और कम आनंददायी है. अब आपके पास मौका है कि आप उसकी इस धारणा को बदल सकती हैं. उस पर नीचे लिखे हस्तमैथुन के तरीके प्रयुक्त करें और देखें की एक सही अर्थ में अब वह पाएगा ‘हाथ द्वारा स्वर्ग’. इसके पहले इस तरीके ‘स्वर्ग’ सिर्फ एक शब्द होता था.

लिंग सबंधी तथ्य
इसके संबंध में यह बता देना जरूरी है- पुरुष की मानसिकता छूने से पहले अपने लिंग के आकार को लेकर अनिश्चितता से भरी होती है. ऐसा क्यों होता है? क्योंकि- अभी तक अधिकांश कारण जो सामने आया है- उसके अनुसार वे ज्यादातर ‘औसत जोन’ के बीच रहते हैं और यहां लिंग की औसत लंबाई 5 से 6 इंच होती है. क्योंकि इस दौरान वह न्युनतम सामने की दूरी से देख रहा है जिसमें कोई भी चीजे अपने सबसे बड़े वास्तविक आकार में नजर आती है. ठीक इसके विपरीत वे अपना लिंग किसी दूसरे ब्लाक से देखते हैं जहां से यह अपने वास्तविक आकार से छोटा दिखाई देता है. इस लिए आपको पुरुषों के इस नजरिये को ध्यान में रखकर यह सब शुरू करना होगा. इसलिए आपको यह जानना जरूरी है कि पुरुषों को हस्तमैथुन का आनंद देने के लिये आपको सबसे पहले उनके लिंग को अच्छा रुतबा, विश्वास व गारंटी देना बेहतर होता है.
इसलिए जब उसका लिंग देखे तुरंत प्रसन्नता जाहिर करें.

 चेहरे पर कुछ खुशी के भाव के साथ ‘वॉव’ जैसे शब्द निकालें. भले ही उसका लिंग कैसा भी हो आप यह कहने से जरा भी न हिचके कितना शानदार है यह. इसके बाद आप उसका लिंग अपने हाथों में लेकर कुछ ऐसा प्रदर्शित करे मानो आप कुछ ऐसा करने वाली हैं जिसकी कल्पना उसने न की हो. फिर उसे बताएं कि जहां तक वह सोच नहीं सकता उससे आगे का आनंद आप उसे देने वाली हैं.
1.पीछे की ओर सेः

उसके लिंग को पकड़ने की पहुंच का सबसे बेहतर तरीका तो वह है जिसे आपका पार्टनर पसंद करता है. लेकिन इस तरीके के लिये आप उसके पीछे घुटनों के बल बैठ जाएं फिर पीछे की ओर से घुमा हाथ सामने लाएं तथा उसके लिंग को अपने हाथों में ले लें. इसके साथ ही उसपर दबाव देने का प्रयत्न करें. जिसे वह पसंद करेगा और थोड़ा कठोर होने लगेगा. तब ऐसे में आप उसके लिंग को और विश्वास के साथ पकय्डे ताकि उसे लगे कि तुम्हें इसकी सारी जानकारी है और तुम इस तरीके से आनंद देने के तरीके को जानती हो.

इस दौरान उसकी पीठ पर अपने स्तनों का दबाव दें. इसका तरीका ठीक उस तरह रखें जैसे आप उसके लिंग को अपने हाथों से आगे पीछे कर हस्तमैथुन का आनंद दे रही हैं उसी रिदम के साथ अपने स्तनों को भी उसकी पीठ से छुलाते जाएं. इसके साथ ही उसके लिंग को अलग-अलग तरीके से हाथों के स्ट्रोक दें और देखें किसमें उसे ज्यादा मजा आता है. इस तरीके से आप जान सकती हैं उसके लिये क्या बेहतर है.
2.वह उपर आप नीचेः
यह आपके लिये एक आरामदायक तरीका है. इस तरीके के लिये आप अपनी पीठ के बल लेट जाएं और आपका पार्टनर अपने घुटनों के बल आपके उपर आ जाए. इस दौरान वह आपके स्तनों से थोय्डा पीछे रहे. अब आप उसके लिंग को अपने दोनों हाथों की गिरफ्त(grip) में ले लें. इसके पश्चात अपनी दोनों हथेलियों को विपरीत दिशा में दबाव के साथ घुमाएं

 जितने तक उसे अच्छा लगें इसके साथ आप चाहें तो इसमें बीच-बीच में मुख मैथुन को भी जोड़ सकती हैं. साथ ही अपनी हथेलियों की सहायता से उसके लिंग की त्वचा को आगे-पीछे करके भी उसे हस्तमैथुन का आनंद दे सकती हैं.
3.संतरे की तरह दबाएं
यह तरीका उससे थोय्डा उलट है. इसमें अपने पार्टनर को पीठ के बल लेट जाने दें. आप उसके लिंग के सामने आरामदायक स्थिति में बैठ जाएं. एक हाथ से उसके शिश्न मुण्ड को अपने हथेलियों की सहायता से कप की तरह ढंक लें. फिर अपनी हथेलियों से उसपर हल्का दबाव डालते हुए उसे मसलें – ठीक उस तरह जैसे आप संतरे को हथेलियों से मसलतें हैं. इस दौरान अपने दूसरे हाथ से उसके लिंग के निचले हिस्से को पकड़ ले या फिर उसके अण्डकोश को सहलाएं. इसके अलावा एक दूसरा तरीका भी आजमा सकती हैं. इसमें चिकनाई युक्त द्रव्य से गीली हथेली को उसके लिंग के शिश्न मुण्ड पर ले जाकर सहलाएं फिर इसके बाद हल्के तरीके से 

थपथपाती रहें इस दौरान अपने दूसरे हाथ से उसके शिश्न की चमय्डी को उपर नीचे कर हस्तमैथुन का मजा दें. यह तरीका उसे काफी आनंद प्रदान करेगा.
4.बास्केट वेबिंग
इस तरीके के लिए अपने दोनों हाथों की उंगलियां एक दूसरे से फंसा ले फिर दोनों हथेलियों को एक दूसरे से जोय्ड लें. इस तरह आपकी हथेलियों के बीच एक गैप बन जाएगा. जिसमें उसके लिंग को घुसा दे. फिर अपने दोनों हाथों को दबाते हुए लिंग के निचले सिरे तक ले जाएं. वहां अपनी बंधी हथेलियों को दोनों ओर घुमाएं. फिर पुनः हाथों को उपर ले आएं. यहां भी हथेलियों को घुमाएं. यह प्रक्रिया लगातार दोहराते जाएं.
5.फायर स्टार्टः
यह काफी मजेदार तरीका है. इसके तहत अपनी दोनों हथेलियों के बीच उसके लिंग को दबा ले. ठीक उसी तरह जैसे दही से माखन निकालने के लिये मथानी को हथेलियों के बीच थामा जाता है. अब अपनी हथेलियों से उसके लिंग को मथना शुरू करें(देखें चित्र). याद रखें इस दौरान आपकी हथेलियां यदि चिकनाई युक्त होगी तो उस ज्यादा आनंद देंगी. इस दौरान अपने अंगूठों की सहायता से उसके शिश्न मुण्ड को भी सहलाते रहें. जिससे उसे अतिरिक्त आनंद मिलेगा.

6.हार्ट बीटः
यह काफी मजेदार तरीका है. इसमें अपनी दोनों हथेलियों में चिकनाई युक्त द्रव्य लगाकर आपस में नमस्कार वाले अंदाज में जोड़ लें. फिर दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाते हुए नीचे झुकाएं. यह स्थिति लगभग बास्केट वेबिंग की तरह हो जाएगी. फिर इसे उसके लिंग पर उपर नीचे करना शुरू करें(देखें चित्र). यह उसे ऐसा आभास कराएगा मानों उसका लिंग योनि के अंदर आगे पीछे हो रहा है. इससे उस काफी उत्तेजना मिलेगी.
7.छल्ले की तरहः
इसमें अपने अंगूठे और उंगलियों के सहारे ‘ओके’ का चिन्ह बनाएं. इस तरीके से एक छल्ला बन जाएगा जिसे लिंग में डालकर घुमाते हुए उपर नीचे कर सकते हैं.
8.अन्य

उपरोक्त तरीकों के अलावा आप ऐसे कई तरीके हस्तमैथुन के निकाल सकती हैं जिससे उसे आनंद आए. मसलन आप अपने नेकलेस से उसके लिंग को फंसा कर हिलाने का प्रयास करें(देखें चित्र) आदि . इस तरीके से आप अपने पार्टनर को चरमोत्कर्ष के निकट तक ले जा सकती हैं और उसे बेहतर सेक्स का आनंद दे सकती हैं. इस दौरान अपने पार्टनर से पूछें या फिर देखें की उसे किस तरीके में ज्यादा आनंद की अनुभूति होती है. ताकि अगली बार उस तरीके को कुछ ज्यादा समय तक आजमा सकें.

युवती हर युवक सदस्य की पत्नी होती है

युवती हर युवक सदस्य की पत्नी होती है...
भारतीय आदिवासियों के जीवन में सेक्स का अपना महत्व है। वे आधुनिक सभ्यता से बहुत दूर संस्कृति परिवर्तन से अछूते हैं। दिन भर की थकान के बाद ये आदिवासी रात्रि होते ही रात्रि क्लबों में एकत्रा हो उत्सव मनाते हैं। इन रात्रि कलबों को युवा-गृह के नाम से सम्बोधित किया जाता है। केवल युवक-युवतियों को इन युवा-गृहों में आने दिया जाता है।
इनकी रंगीन रातें नाच-गाने से आरंभ होकर शराब के दौर के साथ रेंगती हुई प्रणय-लीला की मादकता के साथ समाप्त हो जाती है। सेक्स के इस व्यापार को पाप-पुण्य या नैतिकता के तराजू में नहीं तोला जाता। इसके बावजूद इन युवा गृहों में यौन ज्ञान का प्रशिक्षण दिया जाता है। युवक-युवतियां इन्हीं युवा-गृहों के माध्यम से मन-पसंद जीवनसाथी का चुनाव करते हैं। हमारे देश के विभिन्न भागों में बसने वाले आदिवासियों के अलग-अलग रीति रिवाज हैं।

बस्तर जिले के आदिवासियों में युवा-गृहों के सदस्य केवल अविवाहित लोग ही हो सकते हैं। विधुरों को भी सदस्य बनने का अधिकार प्राप्त है। दस वर्ष की आयु होने पर प्रत्येक युवक-युवती को सदस्य न बनने पर समाज विरोधी कार्य मान कर दण्ड देने की व्यवस्था है। छोटे लड़के-लड़कियों को यौन ज्ञान का प्रशिक्षण दिया जाता है। सदस्य चाहे ऊंची या नीची जाति के हों अथवा अमीर हो या गरीब, सभी को समान दृष्टि से देखा जाता है और उन्हें समान अधिकार होते हैं।
युवा-गृह में प्रत्येक युवती हर युवक सदस्य की पत्नी होती है और एक ही युवक के साथ स्थायी संबंध रखना दोष-पूर्ण माना जाता है। गर्भ धारण करना अशुभ माना जाता है और ऐसी अवस्था में युवा गृह से बाहर निकाल कर उस व्यक्ति के साथ स्थायी रूप से विवाह करवा दिया जाता है जिसके द्वारा गर्भ धारण हुआ हो।

मध्य-प्रदेश प्रान्त के एक भाग में स्थित आदिवासी स्त्रिायां दुहरी नैतिकता अपनाती हैं। यहां की स्त्रिायां अपने पीहर में रहते हुए अपनी इच्छानुसार चाहे जिस पुरूष के साथ प्रणय कर सकती हैं। घर आये अतिथियों के सत्कार स्वरूप रात को वे उनकी शैय्या की शोभा बढ़ाती हैं। इसके विपरीत अपने ससुराल में इन्हें अपने पति के प्रति पूर्ण रूप से वफादार रहना पड़ता है। इन स्त्रिायों के पीहर चले जाने के बाद इनके पति अन्य विवाहित स्त्रियों के साथ आनंद लेते हैं।[/pullquote]
आसाम के आदिवासियों में दस वर्ष से बड़ी युवतियां युवा-गृहों में रात के समय आकर एक साथ सोती हैं। उनके प्रेमी युवक रात में वहीं पहंुच जाते हैं। बस्तर के आदिवासियों की तरह उनके रीति रिवाज समान होते हैं।
मालाबार प्रांत के आदिवासी समूह में लड़कियों का विवाह बहुत कम आयु में हो जाता है। उन्हें शीघ्र ही तलाक दिलवा दिया जाता है। दुबारा इनका विवाह नहीं होता और वे अपने पीहर में रहती हैं। समय समय पर मनपसन्द प्रेमी चुनकर वे उनके साथ यौन संबंध में जो औलाद जन्म लेती है उस पर लड़की की मां का अधिकार माना जाता है इनके समाज में पिता का कोई महत्व नहीं होता।
नीलगिरी की आदिवासियों की विवाहित स्त्रिायां चाहे जितने भी पुरूषों से संबंध रख सकती हैं समाज उसे बुरा नहीं मानता। विवाहित स्त्राी का कोई भी पुराना प्रेमी उसके पति से इजाजत लेकर उसके पास सुविधा-अनुसार आ जा सकता है। इस अनुचित संबंध से पैदा हुई संतान पर वास्तविक पति का अधिकार होता है।
अल्मोड़ा के आदिवासियों में इस प्रकार के मुक्त यौन समागम की खुली छूट नहीं है। युवा-गृहों में युवा वर्ग के लोग संगीत, नृत्य और मदिरा पान के बाद अपने जीवन साथी का चुनाव करते हैं। बाद में विवाह की रस्म पूरी करके सह जीवन बिताते हैं। किसी पराये पुरूष को मदिरा के नशे में यदि स्त्राी अपना शरीर गलती से सौंप देती है तो उसके पति पर निर्भर होता है कि उसे क्षमा करे या नहीं। उस स्थिति में होने वाली संतान पर पति का हक माना जाता है।
[pullquote]अब उड़ीसा प्रांत के आदिवासियों को ही लीजिए। यहां के प्रणय गृहों में संध्या के समय सभी अविवाहित युवतियां एकत्रा हो जाती हैं। दूर-दूर से नौजवान लड़के उपहार प्रणय-संलाप करने इन गृहों में आते हैं। जहां युवतियां भुने हुए मांस और शराब के साथ उनका स्वागत करती हैं। वे तमाम रात एक साथ बिताते हैं। बेदर्दी से परस्पर छेड़-छोड़ और मजाक करते हैं। नाच-गाना चलता रहता है। चुम्बन की प्रथा इनमें नहीं होती। कुछ दिनों के मेल-मिलाप के बाद जो युवक-युवतियां परस्पर चाहने लगते हैं, वे पहली बार शारीरिक संभोग कर सगाई कर लेते हैं और उनकी शादी पक्की मान ली जाती है।
आंध्र प्रदेश के बंजारे आदिवासी समूह में पुरूषों की अपेक्षा स्त्रिायां अधिक कामुक होती हैं। गैर मर्दों से वे संबंध बिल्कुल नहीं रखती। बारह वर्ष की आयु में उनका विवाह कर दिया जाता है। विवाह से पूर्व अन्य युवकों के साथ संबंध रखने में उन्हें काई रूकावट नहीं। यदि लड़की मां बन जाए तो उसके प्रेमी को उससे विवाह करना पड़ता है। विवाह सामाजिक नियमानुसार होता है।
मैसूर की आदिम जातियों में रात्रि के युवा गृहों में आकर युवक-युवतियां अपने प्रेमी-प्रेमिका के साथ रात बिताते हैं। जिनकी कोई प्रेमिका नहीं होती वे युवक रात्रि के समय घर के बाहर निकल कर घूमते है और लड़कियां ढूंढ़ते हैं जो रात के समय उन्हें शैय्या पर उन्हें साथी बना सके। लड़कियां अपने निवास स्थान पर ऐसे लड़कों का स्वागत करती हैं। इसके लिए दोनों पक्षों के घर वालों से पूरी छूट है। जब कोई लड़का लगातार किसी लड़की के यहां आता रहता है तो वे शादी के लिए एक-दूसरे को स्वीकार कर लेते हैं।
नीलगिरी की एक और जाति के आदिवासियों में विवाह के बाद भी स्त्राी-पुरूष तीन वर्ष तक युवा-गृहों में आकर मनोरंजन करते हैं जहां की स्त्रिायां यौन के मामले में अपने पति को धोखा देने में आनंद का अनुभव करती हैं। यदि कोई स्त्राी गर्भवती हो जाए तो वह और उसका पति युवा-गृहों में प्रवेश नहीं पा सकता।
आदिवासियों में युवा-गृहों का महत्वशाली स्थान है और उनमें सेक्स का प्रसार व्यापक-रूप में है। आदिवासियों के जीवन और सभ्यता में वे युवा-गृह एक महत्वपूर्ण अंग की तरह हैं जो उनमें नव-जीवन का संचार करते हैं।

कामाग्नि -फोटो फीवर

कामाग्नि -फोटो फीवर 













Sunday, 18 November 2012

चुंबन



 दांपत्य जीवन में प्रेम में बढोतरी के लिए और परस्पर पर आनंद की प्राप्ति के लिए चुंबन का विशेष महत्व है. कामशास्त्र में इस चुंबन के कई प्रकार की चर्चा की गई है. आगे कामशास्त्र में वर्णित चुंबन के तरीकों और उनके नाम की चर्चा की गई है
 आमतौर पर चुंबन का प्रयोग कामक्रीड़ा से पहले किया जाता है.इसका तात्पर्य यह है कि वासना के वश में व्यक्ति कुछ भी कुछ भी कर सकता है.वात्स्यायन मानते हैं कि चुंबन के प्रयोग से स्त्री-पुरुष के बीच प्रेम बढ़ता है.

 जिन स्थानों पर चुंबन लिए जाते हैं, उनमें मस्तक, गाल, पुरुष का सीना, नारी का उरोज (स्तन), होठ मुख के भीतरी भाग प्रमुख हैं.

कामसूत्र में वर्णन मिलता है कि पश्चिम भारत के कुछ इलाकों में बाहुमूल (बगल) और नाभि में भी चुंबन लिए जाते हैं.

वात्स्यायन का मानना है कि चुंबन के स्थान रागांधता और स्थान विशेष के लोगों के प्रचलन के कारण अलग-अलग हो सकते हैं. इनका प्रयोग सभी लोगों के लिए एक जैसा नहीं हो सकता है.

कामसूत्र के अनुसार, जब पुरुष द्वारा स्त्री बलपूर्वक चुंबन करने के लिए बाध् की जाए, तो वह पुरुष के मुख पर अपना मुख रख लेती है. वह कोई चेष्टा नहीं करती. ऐसे चुंबन को 'निमित्तक' कहते हैं.

जब स्त्री पुरुष के होठ को अपने दोनों होठों में लेकर नीचे वाले होठ को फड़काती है, तो इसे 'स्फुतरितक' कहते हैं.

जब स्त्री पुरुष का होठ अपने होठों से दबा लेती है और अपनी आंखें बंद कर पुरुष की आंखें अपने हाथ से बंद कर देती है, साथ ही अपनी अपनी जीभ की नोक से पुरुष के होठ को रगड़ती है, तो इसे 'घट्टितक' कहा जाता है.



होठों मुख के अतिरिक् अन् अंगों पर चार प्रकार के चुंबन का वर्णन मिलता है.



पुरुष के सीने बगलों पर लिया जाने वाला चुंबन सम कहलाता है.



नारी के उरोजों कपोलों और नाभिमूल पर लिया जाने वाला चुंबन 'पीडित' कहलाता है.
नारी के उरोजों दोनों बगलों पर लिया जाने वाला चुंबन 'अंचित' कहलाता है.

ललाट आंखों पर किया जाने वाला चुंबन 'मृदु' कहलाता है.

यदि स्त्री सोते हुए पुरुष का मुंह देखती हुई अपनी प्रसन्नता के लिए उसका चुंबन ले, तो इससे स्त्री की वासना भड़क उठती है.
यदि पुरुष सोया हुआ हो, तो स्त्री के चुंबन से जागकर अपने प्रति स्त्री की आसक्ति महसूस करे, तो इससे उसकी वासना भड़क उठती है.
यदि स्त्री पुरुष का चुंबन आलस् या कलह समाप् करने के लिए या अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए करे, तो इसे 'चलितक' कहा जाता है.
यदि रात को देर से घर लौटा पुरुष बिस्तर पर सोई हुई स्त्री का चुंबन लेता है, तो इसे 'प्रतिबोधिक' कहा जाता है.

पुरुष जब अपनी बढ़ती हुई उत्तेजना का संकेत देने के लिए दर्पण या जल में स्त्री की छाया का चुंबन करे, तो यह 'छाया चुंबन' कहलाता है.
स्त्री द्वारा पुरुष के पैर का अंगूठा चूमना 'पादांगुष् चुंबन' कहलाता है. यह चुंबन स्त्री की चरम उत्तेजना को प्रकट करता है.
कामसूत्र में कहा गया है कि पुरुष को स्त्री के प्रत्येक कार्य का उत्तर वैसे ही देना चाहिए, जैसा उसे मिल रहा है.