Wednesday, 31 October 2012
थैंक यू सो मच
एक रात बहुत तेज बारिश हो रही थी। एक बुजुर्ग महिला अपनी बंद पड़ी कार के बाहर छाता लेकर खड़ी आने-जाने वाले लोगों को मदद के लिए पुकार रही थी। उस महिला की कार में पानी के कारण कुछ खराबी आ गई थी। काफी देर प्रयास करने के बाद भी कोई उस तूफानी बारिश में रुकने के लिए तैयार नहीं हुआ।तभी एक टैक्सी ड्राइवर उधर से गुजरा। उसने महिला को मदद के लिए पुकारते हुए देखा। एक बार उसने सोचा कि जाने दो, जल्दी घर पहुंचना है। इस चक्कर में कहीं देर न हो जाए। फिर अगले ही पल उसने टैक्सी रोकी और महिला से पूछा। महिला ने बताया कि उसकी गाड़ी खराब हो गई है और उसे तुरंत कहीं पहुंचना है। उस महिला को जहां जाना था, वह टैक्सी ड्राइवर के रास्ते के अपोजिट था। फिर भी उसने महिला की मदद की और उसे उसके गंतव्य तक पहुंचा दिया।महिला जल्दबाजी में थी, किराया दिए बगैर ही चली गई। लेकिन उसका नाम और घर का पता साथ ले गई। कुछ दिनों बाद उस ड्राइवर को एक टीवी गिफ्ट मिला, जिस पर नोट लगा था।
Tuesday, 30 October 2012
फीमेल आर्गजि़मक डिज़ार्डर
फीमेल आर्गजि़मक डिज़ार्डर
महिलाओं में लगातार सेक्सुअल अराउज़ल के बाद भी आर्गज़्म के ना आने को फीमेल आर्गजि़मक डिज़ार्डर कहते हैं। महिलाओं को आर्गज़्म फेज़ तक आने में जो समय लगता है उसे क्लाइमैक्स कहते हैं। महिलाओं में आर्गज़्म आने का समय अकसर फोरप्ले या जी स्पाट के स्टिमुलेशन पर निर्भर करता है।
वो महिलाएं जिन्हें इस प्रकार की परेशानी होती है उनमें इस डिज़ार्डर की इन्टेंसिटी को पहले चेक किया जाता है। कुछ महिलाएं कभी भी क्लाइमेक्स तक नहीं पंहुच पाती हैं और कुछ महिलाएं सिर्फ मास्टर्बेशन से ही क्लाइमेक्स तक पहुंच पाती हैं लेकिन अपने पार्टनर्स के साथ कभी भी इस स्टेज तक नहीं पंहुच पातीं।
इस तरह के डिजार्डर का अभी तक कोई उपचार सामने नहीं आया है। लेकिन
महिलाओं में यह वैजाइना के डा्रई होने से हो सकता है ऐसे में
ल्यूब्रिकेंट्स का इस्तेमाल उपयोगी होता है।
महिलाओं में लगातार सेक्सुअल अराउज़ल के बाद भी आर्गज़्म के ना आने को फीमेल आर्गजि़मक डिज़ार्डर कहते हैं। महिलाओं को आर्गज़्म फेज़ तक आने में जो समय लगता है उसे क्लाइमैक्स कहते हैं। महिलाओं में आर्गज़्म आने का समय अकसर फोरप्ले या जी स्पाट के स्टिमुलेशन पर निर्भर करता है।
वो महिलाएं जिन्हें इस प्रकार की परेशानी होती है उनमें इस डिज़ार्डर की इन्टेंसिटी को पहले चेक किया जाता है। कुछ महिलाएं कभी भी क्लाइमेक्स तक नहीं पंहुच पाती हैं और कुछ महिलाएं सिर्फ मास्टर्बेशन से ही क्लाइमेक्स तक पहुंच पाती हैं लेकिन अपने पार्टनर्स के साथ कभी भी इस स्टेज तक नहीं पंहुच पातीं।
- इस तरह की समस्या के कारण बहुत से हो सकते हैं। लेकिन इसका एक मुख्य कारण पार्टनर से संकोच या किसी प्रकार का डर भी हो सकता है।
- कुछ महिलाओं में क्लिटोरिस और वैजाइना को भी स्टिमुलेशन की ज़रूरत होती है। ऐसी स्थितियों में महिलाएं अपने पार्टनर के साथ इस स्थिति तक पंहुच पाती हैं।
- वो महिलाएं जिन्हें कि आर्गज़्म तक आने में ज़्यादा समय नहीं लगता उनमें यह समस्या आजीवन हो सकती है या यह परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।
- इस तरह के डिज़ार्डर का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। लेकिन ऐसा पाया गया है कि ज़्यादातर स्थितियों में ऐसी परेशानियों का कारण फिज़ियोलाजिकल से ज़्यादा साइकालाजिकल होता है।
- आर्गज़्म सम्बन्धी विकार उन स्थितियों में और बढ़ जाता है जब महिला इस स्थिति तक पहुंचने की बहुत कोशिश करती है।
- जब आर्गज़्म तक पंहुचना ही ध्येय होता है, तो ऐसी स्थिति में तनाव उत्पन्न हो जाता है जिससे कि आर्गज़्म तक पंहुचना और भी मुश्किल हो जाता है। क्लाइमेक्स तक पंहुचने की स्थिति में पार्टनर्स का मूड भी बहुत हद तक ज़िम्मेदार होता है। अगर ऐसी स्थिति में महिला परेशान है या दोनों पार्टनर्स में से कोई भी परेशान है या दिमागी तनाव से ग्रसित है तो ऐसी स्थिति में भी आर्गज़्म तक पंहुचना मुश्किल हो जाता है।
इस तरह के डिजार्डर का अभी तक कोई उपचार सामने नहीं आया है। लेकिन
महिलाओं में यह वैजाइना के डा्रई होने से हो सकता है ऐसे में
ल्यूब्रिकेंट्स का इस्तेमाल उपयोगी होता है।- अगर आर्गज़्म तक ना पंहुच पाने का कारण साइकालाजिकल है तो ऐसी स्थिति में पार्टनर्स को आराम से ऐसी प्रक्रीया करनी चाहिए और ऐसे में आर्गज़्म तक पंहुचने की कोशिश ना कर के आनंद का अनुभव करना चाहिए।
- पार्टनर्स को एक दूसरे को समझने की और खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।
- वो पार्टनर्स जो आर्गज़्म सम्बन्धी विकार से ग्रसित हैं उन्हें एक दूसरे से बातचीत करनी चाहिए। फोरप्ले में अधिक समय देना चाहिए इससे ऐडिक्वेट ल्युब्रिकेशन भी होता है।
- लव मेकिंग के दूसरे तरीके अपनायें जैसे ओरल सेक्स या म्यूचुअल मास्टर्बेशन।
- आर्गज़्म तक पंहुचने का सबसे आसान तरीका है सेक्सुअल इन्टरकोर्स के दौरान पाज़िटिव सोचना। इसकी तुलना में निगेटिव सोच से ऐसी परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
Monday, 29 October 2012
महिलाओं को चरम पर पहुंचाएगी यह सुई
महिलाओं को चरम पर पहुंचाएगी यह सुई
लंदन।। महिलाओं
के चरम को लेकर सालों से तमाम तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं और स्टडीज़
होती रही हैं। कुछ लोगों का तो यहां तक मानना है कि जी स्पॉट जैसी कोई चीज
होती ही नहीं है। लेकिन, कुछ लोगों ने इस पर काम किया और इसमें एक नई
सफलता अर्जित की है। अब देखना यह है कि महिलाओं की सेक्शुअलटी को लेकर किया
गया यह 'चमत्कार' भारत में कब तक लॉन्च होता है और यहां इसे लेकर क्या
प्रतिक्रिया रहती है।
दरअसल, महिलाओं की सेक्स
लाइफ को बेहतर बनाने वाली एक ऐसी सुई बाजार में लाई गई है जिसे लगा दिया
जाए तो महिलाएं बेहतर सेक्शुअल एक्सपीरियंस कर पाएंगी। यह इंजेक्शन एक
सर्जिकल प्रोसीजर है, जो महिलाओं के जी-स्पॉट में लगाया जाएगा। इस इंजेक्शन
से जी-स्पॉट का साइज अस्थायी रूप से बढ़ जाता है। इस इंजेक्शन को लगाने का
पूरा प्रोसीजर केवल आधे घंटे में निपट जाता है और इसे लोकल अनेस्थिसिया
देकर लगाया जाता हैं।
लॉस एंजिलिस में यह आते ही
हिट हो गया है, जहां अब तक महिलाएं वजाइनल रिजुवेनेशन इंस्टिट्यूट ऑफ
अमेरिका के चक्कर लगाया करती थीं। इस क्लिनिक में गाइनिकॉलजिस्ट और सर्जन
डॉक्टर डेविड मैटलॉक हर महीने ऐसे सेशंस लेते हैं जहां जी-शॉट से प्रभावित
होकर महिलाएं इसका प्रोसीजर जानने और समझने आती हैं।
इसके लॉन्च होने के
पांच सालों के अंदर ही दो हजार से भी ज्यादा महिलाएं उनके क्लिनिक में इस
प्रोसीजर को आजमा चुकी हैं। महिलाओं के बीच इसकी बढ़ती पॉप्युलैरिटी के
चलते यह तेजी से और जगहों पर भी उपलब्ध कराया जाने लगा है। हाल ही में इसे
यूके में भी लॉन्च किया गया है।
उसे पॉर्न देखने का शौक है? खतरे की घंटी!
क्या आपका पार्टनर पॉर्न देखने का शौकीन है? यदि हां, तो यह स्लाइड शो आपके
लिए ही बनाया गया है। इसे पढ़ डालिए। दरअसल, हम बताना चाह रहे हैं कि अपने
पति या पत्नी या गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड के पॉर्न देखने के शौक को हल्के
में मत लीजिए। यह खतरे की घंटी है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि आप
तुरंत ही आपाधापी में कोई कदम उठा लें।
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केईएम हॉस्पिटल में सेक्शुअल मेडिसन डिपार्टमेंट के हेड और सेक्स
थेरेपिस्ट, काउंसलर डॉक्टर राजन भोंसले ने इस बारे में कुछ खास चीजें
बताईं। हम आपसे वही शेयर कर रहे हैंज्यादातर लोगों को लगता है कि पॉरनॉग्रफ़ी के साइड इफेक्ट्स नहीं हैं।
लेकिन, रिसर्चेस से यह बात सामने आई हैं कि पॉरनॉग्रफ़ी लोगों की
पर्सनैलिटी में ऐसे बदलाव कर देती है जो संबंधों के लिए घातक सिद्ध हो सकते
हैं। आमतौर पर पॉरनॉग्रफ़ी गुप्त रूप से देखी जाती है, यह शादी में चोरी-चोरी,
चुपके-चुपके के कॉन्सेप्ट को जन्म देती है। इससे शादी में छल-कपट, धोखा
जैसी चीजें पनपती हैं। जितनी ज्यादा पॉरनॉग्रफी देखेंगे, उतना ज्यादा ही प्रॉस्टिट्यूशन, अनरियल अपेक्षाएं करने और धोखाधड़ी की इच्छाएं और कोशिशें ज्यादा बढ़ेंगी।कुछ लोगों का मानना है कि अगर आप पार्टनर से उत्तेजित नहीं होते तो किसी दूसरे के साथ सेक्स का ख्याल या पॉर्न देखने में कोई बुराई नहीं है। भले ही यह ओके-ओके लगता हो, लेकिन इसके अपने खतरे हैं। क्योंकि, तब आप सेक्स पार्टनर के साथ कर रहे होते हैं लेकिन उसके द्वारा उत्तेजित हो कर नहीं बल्कि किसी और के बारे में सोच कर। इसका मतलब, सेक्स है मगर प्यार नहीं...। और, किसी रिश्ते की गहराई को नापने का तरीका सेक्स नहीं है, प्यार है।
बिना एक्साइटमेंट के सेक्स करना और पहले पॉर्न देख कर एक्साइट होना... पार्टनर के सेक्शुअली अपरिपक्व होने की निशानी है।
पॉर्न एक प्रकार का सेक्स अडिक्शन ही है। हालांकि यह प्रामिस्क्यूअटी (यानी स्वछंद संभोग), कंपलसिव हस्त मैथुन से भिन्न है। स्पष्ट शब्दों में कहें तो फैंटसी की एक बुरी लत है यह। यह सेक्शुअली अडिक्टिव बिहेवियर का हिस्सा भी हो सकता है।अगर कोई पॉरनॉग्रफी के सामने घंटों गुजारता है और वह इस बात से भी अनजान हो जाता है कि इससे उसकी असल रिलेशनशिप पर क्या असर पड़ेगा।
माना जाता है कि पॉरनॉग्रफी को ले कर लत के शिकार लोग (महिला व पुरुष, दोनों) ऐसे परिवारों से आते हैं जहां दिक्कतें रही होती हैं और नॉर्मल परवरिश नहीं हुई होती, यानी डाइफंक्शनल फैमिलीज़। यह पाया गया कि ऐसे लोगों का बचपन कहीं न कहीं भावनात्मक रूप से बुरा बीता।जब संबंधों में सेक्स केवल एक फिजिकल ऐक्टिविटी भर हो तो ऐसी चीजें जरूरी हो जाती हैं जिनसे सेक्स की इच्छा जागे। प्रेम का न होना किसी एक की गलती नहीं है। दोनों पार्टनर्स को अपने रिश्ते को खंगालने की जरूरत है, चाहे वे खुद आपस में बैठ कर ऐसा करें या फिर काउंसलर के पास जाएं। अक्सर पत्नियां पतियों को नीचा दिखाने लगती हैं और ब्लेम गेम शुरू हो जाता है। बेहतर है, उपाय खोज कर उस पर अमल लाया जाए।
मिस्टर सेक्सी को मिस करती हैं महिलाएं
मिस्टर सेक्सी को मिस करती हैं महिलाएं
हाल ही में यूसीएलए
रिसर्चरों द्वारा की गई एक स्टडी में पता चला कि जो महिलाएं मिस्टर स्टेबल
चुनती हैं, वे अकसर कुछ समय बाद मिस्टर सेक्सी को मिस करने लगती हैं। ऐसे
में जब उन्हें अपने पार्टनर के साथ अपनी लव लाइफ एंजॉय करनी होती है, तब वे
उनमें खामियां ढूंढने लगती हैं। हालांकि, इस रिसर्च में ऐसा उन महिलाओं के
साथ नहीं पाया गया जिन्होंने सेक्सी पुरुषों के साथ संबंध बनाना ज्यादा
पसंद किया।
यूसीएलए में सायकॉलजी ऐंड कम्युनिकेशन स्टडीज के
प्रफेसर और इस स्टडी में वरिष्ठ लेखक मार्टी हेसलटन बताते हैं, 'महिला
हमेशा अलग-अलग समय में अपने रिलेशन को अलग-अलग ढंग से परखती हैं और उसका
निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि इस सब में वह अपने पार्टनर को कितना
सेक्शुअली अट्रैक्टिव पाती हैं।' हालांकि स्टडी में यह भी सामने आया कि
महिलाओं में इस तरह के नकारात्मक विचार कुछ समय बाद मंद पड़ जाते हैं और
इसीलिए इससे उनके रोमांटिक रिलेशनशिप के लिए किए गए लॉन्ग-टर्म कमिटमेंट पर
कोई असर नहीं पड़ता।
स्टडी की प्रमुख लेखिका क्रिसटीना लारसन ने
कहा, 'भले ही ये महिलाएं अपने रिलेशन के प्रति कम पॉजिटिव हों, वे इसे खत्म
करना हरगिज़ नहीं चाहतीं।' उधर, कुछ हाई-प्रोफाइल स्टडीज के बाद हेसलटन के
लैब ने यह भी बताया कि कैसे महिलाओं के बिहेवियर में ओवुलेशन के दौरान
बदलाव आने लगते हैं।
अपने पार्टनर के प्रति
अट्रैक्शन की नेगेटिव फीलिंग बढ़ने के दौरान महिलाएं अपने मेल पार्टनर के
प्रति अजीब व्यवहार करने लगती हैं। कभी वे अच्छे से तैयार होती हैं, तो कभी
ऊंची आवाज में बोलती हैं। कभी वे ज्यादा ही फेमिनाइन आवाज में बोलने लगती
हैं। इसके अलावा, यह भी पता लगा कि जिन महिलाओं के पर्टनर कम सेक्सी होते
हैं, वे ओवुलेशन के दौरान अपने कुछ फर्टाइल दिनों में दूसरे पुरुषों के
प्रति अट्रैक्ट होने लगती हैं।
लारसन ने कहा, 'बहुत सी रिसर्च में यह बात सामने आई है कि महिलाओं की पसंद समय के साथ-साथ बदलती है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब उनका असर उनके रिलेशनशिप पर पड़ा हो।' लारसन और हेसलटन ने इस स्टडी की शुरुआत 41 अंडरग्रैजुएट महिलाओं से खास उनकी ओवुलेशन साइकल पर फोकस करते हुए की जो अपने अपोजिट सेक्स के साथ लॉन्ग-टर्म रिलेशनशिप में थीं। रिसर्च के मुताबिक, जिन महिलाओं के पार्टनर ज्यादा सेक्शुअली अट्रैक्टिव थे, वे अपने रिलेशनशिप से उतनी ही ज्यादा खुश भी थीं।
Friday, 26 October 2012
मुख मैथून
मुख मैथून
वात्यायन के कामसूत्र के मुताबिक सहवास करते समय ऐसी कई कलाओं का प्रयोग किया जाता है, जिससे पार्टनर को ज्यादा से ज्यादा यौन सुख की अनुभूती हो। उन्हीं कलाओं में से एक कला है मुख मैथून, हालाकि भारत में इसे पूरी तरह से सही करार नहीं दिया गया है, मगर लोगों का मानना है कि यह सेक्स क्रिया के दौरान सबसे ज्यादा सुख प्रदान करने वाली कला है। मुखमैथून के दौरान ज्यादातर पुरूष चाहते है उन्हें अपने पार्टनर का हर अंग दिखाई देता रहे और घुटने के बल बैठी महिला पार्टनर की दमदार किक का पूरा मजा उसे मिल सके। हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं, जिससे सेक्स के दौरान मुखमैथुन को और बेहतर बनाया जा सकता है।
इसके लिए सबसे पहले आप अपनी पाटर्नर को पीठ के बल लेट जाने के लिए कहें, हां एक बात का ध्यान रखें आपकी पार्टनर को इस तरह लिटाएं जिससे आप अपने मुख द्वारा अधिकतम गहराई का आनंद दे सकें। इस तरीके से जहां आपकी महिला पार्टनर को गहराई से सुख की अनुभूती होगी वहीं आपके पास उसका पूरा कंट्रोल भी रहेगा। मुखमैथुन के दौरान पाटर्नर को सेक्सी रोमांच प्रदान करने के लिये उसकी आंखों से आंखे मिलाएं रखे।
मुखमैथून करते समय आप चाहें तो अपने हाथों का प्रयोग भी कर सकते हैं। इसके लिए अपनी हथेलियो को लिंग के चारों ओर रखें और अपने होठों को उस पर धीमे-धीमे घुमांए इससे आपके पुरूष पार्टनर को सुख की अनुभूती होगी। मुख मैथून करते समय कुछ पुरूषों को अपना हाथ सिर के पीछे रखते है इससे वे कठोर मैथून करना चाहते है, अगर आपको इस से कोई भी तकलीफ हो तो बेहिचक अपने पुरूष पार्टनर को बता दें।
मुखमैथून के दौरान अपनी महिला पार्टनर की सिसकियों को ध्यान से सुने और ध्यान दें उसे क्या ज्यादा पसंद आ रहा है। जब महिला मुख मैथुन कर रही हो तब हो सकता है उस महिला की उंगलियां पुरूष के अन्य अंगों को सहला रहीं हों।
अगर आप चाहें तो उस दौरान महिला का हाथ अपनी पसंद की जगह पर रख सकते हैं। कुछ लोगों को मुख मैथून के दौरान लिंग मुख में ज्यादा अंदर तक ले जाना पसंद होता है। इसके लिए मुख के तालू को ऊपर उठा कर मुख मैथून करें इससे लिंग को ज्यादा अंदर जाने के स्पेस मिल जाता है।
मुख मैथून के दौरान एक बात का विषेश ध्यान रखें कि कुछ का लिंग काफी बड़ा होता है, जिससे हो सकता है महिला पार्टनर को दिक्कत हो सकती है। इसलिए मुख मैथून के दौरान कोई जबरजस्ती न करें।
वात्यायन के कामसूत्र के मुताबिक सहवास करते समय ऐसी कई कलाओं का प्रयोग किया जाता है, जिससे पार्टनर को ज्यादा से ज्यादा यौन सुख की अनुभूती हो। उन्हीं कलाओं में से एक कला है मुख मैथून, हालाकि भारत में इसे पूरी तरह से सही करार नहीं दिया गया है, मगर लोगों का मानना है कि यह सेक्स क्रिया के दौरान सबसे ज्यादा सुख प्रदान करने वाली कला है। मुखमैथून के दौरान ज्यादातर पुरूष चाहते है उन्हें अपने पार्टनर का हर अंग दिखाई देता रहे और घुटने के बल बैठी महिला पार्टनर की दमदार किक का पूरा मजा उसे मिल सके। हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं, जिससे सेक्स के दौरान मुखमैथुन को और बेहतर बनाया जा सकता है।
इसके लिए सबसे पहले आप अपनी पाटर्नर को पीठ के बल लेट जाने के लिए कहें, हां एक बात का ध्यान रखें आपकी पार्टनर को इस तरह लिटाएं जिससे आप अपने मुख द्वारा अधिकतम गहराई का आनंद दे सकें। इस तरीके से जहां आपकी महिला पार्टनर को गहराई से सुख की अनुभूती होगी वहीं आपके पास उसका पूरा कंट्रोल भी रहेगा। मुखमैथुन के दौरान पाटर्नर को सेक्सी रोमांच प्रदान करने के लिये उसकी आंखों से आंखे मिलाएं रखे।
मुखमैथून करते समय आप चाहें तो अपने हाथों का प्रयोग भी कर सकते हैं। इसके लिए अपनी हथेलियो को लिंग के चारों ओर रखें और अपने होठों को उस पर धीमे-धीमे घुमांए इससे आपके पुरूष पार्टनर को सुख की अनुभूती होगी। मुख मैथून करते समय कुछ पुरूषों को अपना हाथ सिर के पीछे रखते है इससे वे कठोर मैथून करना चाहते है, अगर आपको इस से कोई भी तकलीफ हो तो बेहिचक अपने पुरूष पार्टनर को बता दें।
मुखमैथून के दौरान अपनी महिला पार्टनर की सिसकियों को ध्यान से सुने और ध्यान दें उसे क्या ज्यादा पसंद आ रहा है। जब महिला मुख मैथुन कर रही हो तब हो सकता है उस महिला की उंगलियां पुरूष के अन्य अंगों को सहला रहीं हों।
अगर आप चाहें तो उस दौरान महिला का हाथ अपनी पसंद की जगह पर रख सकते हैं। कुछ लोगों को मुख मैथून के दौरान लिंग मुख में ज्यादा अंदर तक ले जाना पसंद होता है। इसके लिए मुख के तालू को ऊपर उठा कर मुख मैथून करें इससे लिंग को ज्यादा अंदर जाने के स्पेस मिल जाता है।
मुख मैथून के दौरान एक बात का विषेश ध्यान रखें कि कुछ का लिंग काफी बड़ा होता है, जिससे हो सकता है महिला पार्टनर को दिक्कत हो सकती है। इसलिए मुख मैथून के दौरान कोई जबरजस्ती न करें।
संभोग के लिए कैसे उत्तेजित करें पुरूष को
संभोग के लिए कैसे उत्तेजित करें पुरूष को
अगर आप की सेक्स लाइफ आज कल
ठीक नहीं चल रही है। या फिर आप अपने पार्टनर को पुरी तरह सेक्स का मजा
नहीं दे पा रही है तो यह लेख आपकी पूरी मदद करेगा। जैसा कि हम आपको अपने
पूर्व के लेखों में बता चुके है कि सेक्स एक कला होती है, और अपने सेक्स
लाइफ को शानदार बनाने के लिए आपको समयानुसार सेक्स के तरीकों को परिवर्तन
भी करतें रहना चाहिए। इससे आपका साथी कभी भी बोर नहीं होगा और आप एक
स्वस्थ सेक्स लाइफ का आनंद उठायेंगी।
संभोग के दौरान बहुत सी ऐसी चीजें है जिनका प्रयोग कर आप अपने साथी को पूरी तरह उत्तेजित कर सकती है। बस जरूरत है उन नुस्खों को जानने की। बिस्तर पर हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी ऐसा काम न करें जो कि आपके साथी को पुराना या फिर बुरा लगे। हम आपको यहां पर उनमें से कुछ नुस्खों के बारें में बताऐंगे जिनका प्रयोग कर अपनी सेक्स लाइफ को और भी शानदार बना सकती है।
पुरूष को कैसे करें उत्तेजित:
होठों का प्रयोग: एक स्त्री का होंठ उसकी कामुकता का सबसे बड़ा हथियार होता है। यदि होठों का सही प्रयोग स्त्री संभोग के दौरान करें तो मर्द पूरी तरह उत्तेजित हो सकतें है। बिस्तर पर पुरूष के होठों को अपने होठों से रगड़े और धीमें-धीमें अपने दोनों होठों से साथी के निचले होंठ को दबाऐ और बहुत ही प्यार से उन्हे चुमना शुरू करें। ध्यान रहें यदि आप इस दौरान अपने होठों पर लिपस्टीक आदी का प्रयोग करती है तो आपके साथी को और भी अच्छा लगेगा।
बॉडी लैंग्वेज: बॉडी लैंग्वेज किसी भी काम के शुरूआत के लिए बहुत ही मायने रखता है। तो संभोग से पूर्व अपका बॉडी लैंग्वेज ऐसा होना चाहिए जैसे कि आप प्यार करने के लिए बेचैन हो और अपने साथी को खूब प्यार करना चाहतीं है। बिस्तर पर एक स्त्री अपने शरीर में जितना लचक पैदा कर सकती है उतना ही ज्यादा पुरूष को आनंद मिलता है। अपने शरीर को उस हिसाब से पुरूष के सामने पेश करें जिससे आपके साथी उत्तेजित हो और प्यार करने के लिए बेचैन हो जाये।
प्रदर्शन: प्रदर्शन संभोग को और भी रोचक और मजेदार बना देता है। संभोग से पूर्व आप ऐसे कपड़ो को पहने जिससे कि आपके शरीर का ज्यादा से ज्यादा अंग आपके साथी के सामने प्रदर्शित हो। इस दौरान आप यदि कोई छोटी ड्रेस का चयन करती हैं तो ध्यान रहें कि आपके शरीर का उभार अपने कपड़ो से साफ झलकता हो विशेषकर ऐसे अंग जो कि पुरूष को सबसे ज्यादा आकर्षित करतें है। डीप वी नेक की टॉप का प्रयोग कर सकती है जो कि आपके स्तन विवर को एक शानदार लुक देंगे और साथी को आकर्षित करेंगे।
बालों के साथ खेलना: जिस तरह से आप अपने होठों के प्रयोग से अपने साथी को उत्तेजित कर सकती है ठीक उसी प्रकार से आप अपने बालों से भी अपने साथी को पूरी तरह उत्तेजित कर सकती है। आपको बता दें कि पुरूषों को भीगें बाल बहुत पसंद होतें है। सेक्स के दौरान जब स्त्री के भीगें बालों से पानी की बूंदे पुरूष के कंधों पर गिरती है पुरूष और भी कामुक हो जातें है। आप अपने बालों से साथी के चेहरे और शरीर के अन्य अंगो पर स्पर्श देकर इस क्रिया को और भी आनंद से भरपूर कर सकती है।
संभोग के दौरान बहुत सी ऐसी चीजें है जिनका प्रयोग कर आप अपने साथी को पूरी तरह उत्तेजित कर सकती है। बस जरूरत है उन नुस्खों को जानने की। बिस्तर पर हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी ऐसा काम न करें जो कि आपके साथी को पुराना या फिर बुरा लगे। हम आपको यहां पर उनमें से कुछ नुस्खों के बारें में बताऐंगे जिनका प्रयोग कर अपनी सेक्स लाइफ को और भी शानदार बना सकती है।
पुरूष को कैसे करें उत्तेजित:
होठों का प्रयोग: एक स्त्री का होंठ उसकी कामुकता का सबसे बड़ा हथियार होता है। यदि होठों का सही प्रयोग स्त्री संभोग के दौरान करें तो मर्द पूरी तरह उत्तेजित हो सकतें है। बिस्तर पर पुरूष के होठों को अपने होठों से रगड़े और धीमें-धीमें अपने दोनों होठों से साथी के निचले होंठ को दबाऐ और बहुत ही प्यार से उन्हे चुमना शुरू करें। ध्यान रहें यदि आप इस दौरान अपने होठों पर लिपस्टीक आदी का प्रयोग करती है तो आपके साथी को और भी अच्छा लगेगा।
बॉडी लैंग्वेज: बॉडी लैंग्वेज किसी भी काम के शुरूआत के लिए बहुत ही मायने रखता है। तो संभोग से पूर्व अपका बॉडी लैंग्वेज ऐसा होना चाहिए जैसे कि आप प्यार करने के लिए बेचैन हो और अपने साथी को खूब प्यार करना चाहतीं है। बिस्तर पर एक स्त्री अपने शरीर में जितना लचक पैदा कर सकती है उतना ही ज्यादा पुरूष को आनंद मिलता है। अपने शरीर को उस हिसाब से पुरूष के सामने पेश करें जिससे आपके साथी उत्तेजित हो और प्यार करने के लिए बेचैन हो जाये।
प्रदर्शन: प्रदर्शन संभोग को और भी रोचक और मजेदार बना देता है। संभोग से पूर्व आप ऐसे कपड़ो को पहने जिससे कि आपके शरीर का ज्यादा से ज्यादा अंग आपके साथी के सामने प्रदर्शित हो। इस दौरान आप यदि कोई छोटी ड्रेस का चयन करती हैं तो ध्यान रहें कि आपके शरीर का उभार अपने कपड़ो से साफ झलकता हो विशेषकर ऐसे अंग जो कि पुरूष को सबसे ज्यादा आकर्षित करतें है। डीप वी नेक की टॉप का प्रयोग कर सकती है जो कि आपके स्तन विवर को एक शानदार लुक देंगे और साथी को आकर्षित करेंगे।
बालों के साथ खेलना: जिस तरह से आप अपने होठों के प्रयोग से अपने साथी को उत्तेजित कर सकती है ठीक उसी प्रकार से आप अपने बालों से भी अपने साथी को पूरी तरह उत्तेजित कर सकती है। आपको बता दें कि पुरूषों को भीगें बाल बहुत पसंद होतें है। सेक्स के दौरान जब स्त्री के भीगें बालों से पानी की बूंदे पुरूष के कंधों पर गिरती है पुरूष और भी कामुक हो जातें है। आप अपने बालों से साथी के चेहरे और शरीर के अन्य अंगो पर स्पर्श देकर इस क्रिया को और भी आनंद से भरपूर कर सकती है।
Thursday, 25 October 2012
दर्द से कामुकता का अनोखा रिश्ता!
दर्द से कामुकता का अनोखा रिश्ता!
चुंबन इतनी ज़ोर से लेना कि दम घुट जाए, हाथों को बांधकर
शरीर को पूरे नियंत्रण में ले आना और फिर जो चाहे करना, मारना कभी चांटों
से, कभी चाबुक से, कभी चमड़े की बेल्ट से, यहां तक कि पॉलिथीन से मुंह को
ऐसे दबाना कि सांस रुक-सी जाए, लेकिन पम्मी को ये सब कामोत्तेजक लगता है.
पम्मी के मुताबिक संभोग के दौरान एक-दूसरे को नोचने या दांत से काटने जैसे
अनुभव से ये कहीं आगे है, क्योंकि ये दर्द के लेन-देन और ताकत की
अभिव्यक्ति का अनोखा खेल है जो कामुकता को एक नए मुकाम तक ले जाता है. इस
जीवनशैली में एक शख्स ‘डॉमिनेन्ट’ यानी हावी होता है और दूसरा ‘सबमिसिव’
यानी अधीन. पहले का हक है अपना ज़ोर आज़माना और दूसरे की ज़िम्मेदारी है उस
शक्ति प्रदर्शन को बर्दाश्त करना. एक निजी कंपनी में काम कर रहीं 28
वर्षीय पम्मी कहती हैं, “हम अधीन रहना पसंद करते हैं, इस तरह के बर्ताव से
हमें दर्द नहीं होता, बल्कि हम आनंद लेते हैं और हमारे पार्टनर को हर वक्त
ज़िम्मेदारी से सोचना होता है कि कहीं हद पार ना हो जाए और हमें चोट न
लगे.”
शक्ति इतनी की रोमांच हो, पर चोट न लगे :
‘बीडीएसएम’ के नाम से जानी जाने वाली ये जीवनशैली पम्मी की ही पसंद नहीं
है, 48 वर्षीय जया भी दो साल से अपने जीवन को ऐसे ही जी रही हैं. जया पिछले
28 वर्षों से महिलाओं के मुद्दों पर काम कर रही हैं और यौन हिंसा के खिलाफ
हैं, लेकिन अपने जीवन में ऐसे यौन संबंध को गलत नहीं मानती. जया कहती हैं,
“यह हिंसक नहीं है, बल्कि यह जीवनशैली बहुत अलग है, क्योंकि इसका नियम तय
है - ज़ोर-आज़माइश आप तभी कर सकते हैं जब दोनों की रज़ामंदी हो - यानी
शक्ति का इस्तेमाल उतना जो रोमांच दे, पर चोट न पहुंचाए.” पम्मी के मुताबिक
तो जिस्मानी रिश्ते का ये रोमांच उनकी रूहानी ज़रूरतें भी पूरी करता है.
दरअसल पम्मी समलैंगिक हैं और खुद को मर्दाना मानती हैं, लेकिन अपने रिश्ते
में वो ‘नाचीज़’ होना पसंद करती हैं, “दुनिया मुझे एक मर्द की तरह हमेशा
ताकतवर देखना चाहती है, लेकिन जब अपने रिश्ते में मैं खुलकर अपनी पार्टनर
को खुद पर हावी होने देती हूं तो ये मुझे अपनी कोमल स्त्रियोचित भावना को
ज़ाहिर करने की आज़ादी देता है.” पम्मी की जीवनसाथी सारा बताती हैं कि
शक्ति का प्रदर्शन सिर्फ संभोग के समय ही काम नहीं करता, अगर युगल चाहे तो
ये चौबीसों घंटे झलक सकता है. उदाहरण के तौर पर सारा कहती हैं, “पैर धोना,
पैरों पर गिरकर पूजा करना, कपड़े मेरी पसंद के ही पहनना, खाना खाने से पहले
या शौचालय तक
ज़ोर-ज़बरदस्ती या रज़ामंदी?:भारत के जाने-माने सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर नारायण रेड्डी बताते हैं कि इस जीवनशैली से जुड़े लोग उनके पास भी आते रहे हैं, हालांकि ये पिछले 20 सालों में उनके पास आए कुल मरीज़ों का एक फीसदी ही होंगे. उन्होंने कहा कि उनके पास आए मरीज़ों में से ज़्यादातर की उम्र 30 से 50 वर्ष के बीच रही है और ये मध्यम या उच्च वर्ग के परिवारों से थे. डॉ. रेड्डी के मुताबिक उनके पास जो मरीज़ आए, वो तो अपने पार्टनर की शिकायत लेकर आए - सिगरेट से जलाना, दांत से काटना, सुंई चुभोना, चेन से बांधना, कुत्ते का पट्टा बांधकर घुमाना, नीचा दिखाना - यानि एक व्यक्ति इस तरह की जीवनशैली की चाहत रखता था, और दूसरे को ये नापसंद थी, और इसलिए वो उनके पास मदद मांगने आए. डॉ रेड्डी कहते हैं, “किसी रिश्ते में काम उत्तेजना अगर सिर्फ चोट या दर्द पहुंचाने से ही पैदा हो तो उसे ‘सेक्सुअली प्रोब्लमाटिक बिहेवियर’ कहेंगे, क्योंकि ये लंबे दौर में परेशानी पैदा कर सकता है,
शुरू में इसका नयापन
रोमांच पैदा कर सकता है लेकिन कुछ समय में ये शारीरिक दर्द पैदा कर सकता है
और मानसिक तौर पर भी चोटिल कर सकता है.” डॉ रेड्डी ये भी सवाल पूछते हैं
कि असल ज़िन्दगी में अपने जीवनसाथी की ऐसी चाहत हां या ना कहने की
स्वतंत्रता असल मायने में कितने लोगों को होती है? पम्मी, सारा, जया और
उनके दोस्तों के मुताबिक वो इन शंकाओं से भली-भांति वाकिफ़ हैं, इसीलिए
करीब एक साल पहले उन्होंने इस जीवनशैली के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए
एक संगठन बनाया – ‘द किंकी कलेक्टिव’.
जाने से पहले अनुमति लेना, औरों के सामने उसे नीचा दिखाना ये
भी इस जीवनशैली का हिस्सा है
‘द किंकी कलेक्टिव’:
बीडीएसएम जीवनशैली विश्व के कई देशों में अब कोई छिपी बात नहीं है, लेकिन
भारत में इसकी जानकारी इंटरनेट के माध्यम से ही फैली है. इस विचारधारा के
लोग और साथियों को ढूंढने में सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों का प्रयोग करते
हैं. इस जीवनशैली पर बहस और जानकारी के लिए न कोई आम चर्चा का मंच है, न ही
माहौल. जया के मुताबिक इसी कमी को दूर करने के लिए उन्होंने यह संगठन
बनाने फैसला किया. इसके ज़रिए वह मानसिक रोगों की पढ़ाई कर रहे छात्रों,
मानवाधिकार सम्मेलन, महिलाओं के मुद्दों पर काम कर रहे आंदोलनकारियों वगैरह
के बीच अपनी बात रख चुकी हैं.
सारा बताती हैं, “हमारा मकसद यह भी है कि इस
जीवनशैली को अपना रहे लोगों को बता सकें कि इसके अपने कायदे-कानून हैं,
मसलन, रज़ामंदी कितनी ज़रूरी है और ताकतवर को ज़िम्मेदार होना आवश्यक है.”
कामसूत्र समेत भारत के पौराणिक ग्रंथों में कामुकता का अध्ययन कर कई
किताबें लिख चुकी संध्या मूलचंदानी इस जीवनशैली से परिचित हैं. वे कहती
हैं, “हमारे ग्रंथों में तो ऐसी जीवनशैली का कोई विशिष्ट उल्लेख नहीं है,
लेकिन इनका लहज़ा आलोचनात्मक नहीं है, बल्कि इन ग्रंथों की विचारधारा बहुत
उदारवादी है यानी मानव-व्यवहार में हर तरह की आज़ादी देनेवाली.” हाल ही में
छपी बीडीएसएम जीवनशैली पर आधारित किताब, ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे’ का उल्लेख
देते हुए संध्या कहती हैं कि इस किताब को पढ़ने को लेकर उत्सुकता इस बात
का सूचक है कि इस बारे में जानने और परखने की चाहत है, जिसे रोकना नहीं
चाहिए. ‘द किंकी कलेक्टिव’ के सदस्यों का मानना है कि जैसे महिलाओं के समान
अधिकारों या समलैंगिकों की पहचान से जुड़े मुद्दे शुरुआत में असहज लगते
थे, उसी तरह इस जीवनशैली के बारे में भी लोगों के मन में संवेदनशीलता आने
में समय लगेगा. लेकिन क्या भारत के परिवेश में समाज इन सभी मुद्दों को एक
तराज़ू पर रख पाएगा? (कुछ लोगों के नाम बदले गए हैं.)
पत्नी के नितम्ब पर चुम्बन ने अदालत में पहुँचाया
पत्नी के नितम्ब पर चुम्बन ने अदालत में पहुँचाया
अपनी पत्नी के नितम्ब पर लिए गए चुम्बन ने एक व्यक्ति को अदालत के कटघरे में खड़ा कर दिया। आस्ट्रेलिया के एक समाचार पत्र द मरकरी के मुताबिक यह बेरोजगार व्यक्ति पिछले साल जून में अपनी पत्नी के घर दारू पीकर पहुँच गया था। वहाँ उसने नशे की हालत में उसके नितम्बों पर चुम्बन कर दिया।
दरअसल यह 48 वर्षीय व्यक्ति अपनी पत्नी से बात करने गया था। वो बिस्तर पर उल्टी लेटी हुई थी। इस व्यक्ति ने उससे दो बार पलटने के लिए कहा। जब वो नहीं पलटी तो वो उसके ऊपर चढ़ गया और उसके कपड़े उतारकर उसके नितम्बों पर ही चूम लिया।
जब इन दोनों के बच्चे अचानक कमरे में पहुँच गए तो महिला ने कहा कि उसके साथ बदतमीजी हो रही है। इस पर आरोपी ने अश्लील टिप्पणी कर दी।
महिला ने अपने पति की इस हरकत पर उसके खिलाफ मामला दर्ज करा दिया।
आरोपी की वकील ने कोर्ट में कहा कि वो तो सिर्फ अपनी तनावग्रस्त पत्नी का हौसला बढ़ाना चाहता था। हालांकि यह भी सच है कि वो हद से आगे बढ़ गया था।
इस मामले ने जज को भी पशोपेश में डाल दिया है। मामला देख रही जज ओलिविया मैकटैगार्ट ने कहा कि वो कोई भी फैसला सुनाने से पहले इस तरह के अन्य मामलों का अध्ययन करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि इस मामले में हिरासत ही सही सजा होगी।
नंगी होकर करती है मर्दों का इलाज
नंगी होकर करती है मर्दों का इलाज
न्यूयॉर्क की एक महिला मनोचिकित्सक पुरुष मरीजों का इलाज करने के लिए
नंगी हो जाती है। वह न्यूड थेरेपी के जरिए मर्दों की यौन कुंठा को बाहर
निकालती है। उसका कहना है कि वह दुनिया के महान चिकित्सक फ्रायड की
थ्योरी के अनुरुप इलाज कर रही है।
उसका कहना है कि ऐसा करके वह पुरुषों के मन में दबी हुई यौन इच्छाओं को बाहर निकालने में कामयाब होती है। लेकिन यह चिकित्सा वह ऑनलाइन करती है। वह मरीजों के इलाज के लिए वेबकैम का इस्तेमाल करती है। उसका कहना है कि वह इस थैरेपी के माध्यम से मरीजों से शीघ्र एक अंतरंग रिश्ता स्थापित कर लेती हैं, जिससे वह खुलकर अपनी कुंठाओं को व्यक्त कर पाते हैं।
उसका कहना है कि वह मनोचिकित्सा के जन्मदाता फ्रायड की फ्री एसोसियशन थ्योरी की तरह न्यूड थैरेपी का इस्तेमाल करती हैं। मरीजों को यह थैरेपी काफी पसंद आ रही है। वह एक सेशन की कीमत 7000 रूपए लेती है। इस थैरेपी के माध्यम से वह अब तक 25 लोगों को ठीक कर चुकी हैं।
वीर्य निकालेगी मशीन
वीर्य निकालेगी मशीन
वीर्य दान का शौक ज्यों-ज्यों बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसे आसान बनाने के
लिए नई-नई तकनीकें खोजी जा रही है। चीन के एक हॉस्पिटल ने इसी दिशा में काम
करते हुए वीर्य निकालने के लिए 'हैंड्स फ्री' मशीन का इस्तेमाल शुरू किया
है। इस मशीन की सहायता से दानी के वीर्य को बिना हाथों का इस्तेमाल किए,
आसानी से निकाला जा सकता है।
हॉस्पिटल के यूरोलॉजी विभाग के निदेशक ने बताया है कि हैंड्स फ्री एक्सट्रैक्टर का प्रयोग ऐसे दानी कर सकेंगे जिन्हें स्पर्म डोनेशन का पुराना तरीका पसंद नहीं है।
ऐसे काम करती है मशीन
हैड्स फ्री स्पर्म एक्सट्रैक्टर मशीन में सामने की ओर एक मसाज पाइप लगी हुई है। पाइप को डोनर्स की हाइट के मुताबिक एडजस्ट किया जा सकता है। इस मशीन में स्पीड,
फ्रिक्वेंसी और तापमान को भी नियंत्रित किया जा सकता है। मशीन के ऊपरी हिस्से में एक स्क्रीन लगाई गई है, जिसकी सहायता से दानी एक्सट्रैक्शन की प्रक्रिया को देख सकते हैं।
दो योनि वाली महिला हेज़ल जोन्स
दो योनि वाली महिला हेज़ल जोन्स
यह कुदरत का करिश्मा नहीं तो और क्या है कि ब्रिटेन की हेजल जोन्स दो योनियों के साथ पैदा हुई। अब तक की जानकारी में यह दुनिया का पहला मामला है जहाँ एक औरत की एक की जगह दो योनियाँ (vagina) हैं। हेजल की दोनों योनियाँ पूर्ण विकसित हैं, सेक्स के लिए उपयुक्त भी। शादीशुदा हेजल कहती है, आम महिलाएँ जहां एक बार अपना कौमार्य खोती हैं, वहीं मैंने दो बार अपना कुंवारापन अपने पति को दिया है, इसकी मुझे और मेरे पति दोनों को खुशी है।
ब्रिटेन की इस महिला में शारीरिक दोष के कारण पूरी तरह विकसित दो योनियाँ हैं।
हेजल को अपने इस शारीरिक दोष पर कोई शर्मिदगी नहीं है।
वहीं हेजल के पति रिकी का कहना है कि हेजल की इस शारीरिक बनावट से उसे भी कोई समस्या नहीं है बल्कि हेजल की शारीरिक बनावट उसे दूसरों से अलग बनाती है।
हेजल के मुताबिक उन्हें अपने इस शारीरिक दोष के बारे में किशोरवस्था में पता चला।
इस महिला को एक नग्न फ़िल्म निर्माता ने दस लाख डॉलर की पेशकश की जिसे इस महिला ने ठुकरा दिया।
पत्नी के गुप्तांग में मिर्च रगड़ी
दरिंदे पति ने भाइयों के साथ मिलकर पत्नी के गुप्तांग में मिर्च रगड़ी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के माल थाना क्षेत्र में अवैध संबंधों का आरोप लगाकर एक पति ने अपनी पत्नी के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। उसने अपनी पत्नी को बल्ली से उल्टा लटकाकर जमकर पीटा, फिर अपने भाइयों के साथ मिलकर उसके गुप्तागों में मिर्च रगड़ दी।
आरोप है कि ये लोग महिला के बाल काटने के बाद उसे मारने की तैयारी कर रहे थे कि अचानक महिला किसी तरह वहाँ से भाग निकली। पुलिस ने रात को हुई इस वारदात को लेकर सुबह एफआईआर दर्ज कर ली और अपराधियों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।
महिला को मेडिकल जांच के लिए भेज दिया गया है।
इस मामले में माल पुलिस ने कार्रवाई करने में ढिलाई बरती, जिसके चलते एसएसपी (लखनऊ) आरके चतुर्वेदी ने एसओ (माल) जगदीश यादव को लाइन हाजिर कर दिया है, जबकि दारोगा सत्यदेव सिंह और बीट के सिपाही को सस्पेंड कर दिया है। महिला ने अपनी तहरीर में बताया कि वह अपने पति शिवकुमार रावत और चार बच्चों के साथ केड़ौरा गांव में रहती है।
शिवकुमार, उसका भाई रामू और शिवबरन अवैध कच्ची शराब बनाकर बेचते हैं। इसी को लेकर उसमें और शिवकुमार में विरोध था। काफी कोशिश के बाद भी जब शिवकुमार ने धंधा बंद नहीं किया, तो वह मायके चली आई। यहाँ 28 सितम्बर को वह बहनोई पप्पू के साथ फिर से ससुराल लौट आई।
बुधवार रात उसका शिवकुमार से फिर झगड़ा हुआ। इस दौरान शिवकुमार ने महिला पर आरोप लगाया कि उसका मायके में कई लोगों से अवैध संबंध हैं। इसके बाद शिवकुमार अपने चारों बच्चों को गांव में ही अपने पुराने घर छोड़ आया और वहाँ से आकर उसने पत्नी को मारना-पीटना शुरू कर दिया। घर में ही टीन शेड के पास बल्ली से उसे उल्टा लटका दिया और मारने लगा।
इस दौरान शिवकुमार के दोनों भाई रामू और शिवबरन भी आ गए। इन तीनों ने मिलकर उसके गुप्तांग में मिर्च रगड़ दी और कहने लगे कि इसके बाल काटकर हत्या कर देंगे और लाश नहर में फेंक देंगे। इसी दौरान शराब खरीदने के लिए एक शख्स घर आ गया। शिवकुमार और दोनों भाई उससे मिलने के लिए बाहर चले गए, तभी मौका देखकर वह वहाँ से भाग निकली।
यहाँ से वह पड़ोस के एक घर पहुँची, जहाँ पड़ोसी ने उसके हाथ में बंधी रस्सी खोली। तभी शिवकुमार वहाँ आ पहुँचा और उसने फिर मारपीट शुरू कर दी। आखिरकार पड़ोसियों ने शिवकुमार का विरोध किया और महिला को गाँव में ही रहने वाले उसके मौसा के यहाँ भेज दिया। फिलहाल महिला का पति अपने दोनों भाइयों के साथ फरार है।
संभोग के दौरान नाखूनों की खरोंचें
संभोग के दौरान नाखूनों की खरोंचें
आचार्य वात्स्यायन ने कामसूत्र में नखक्षेद अर्थात संभोग के दौरान
नाखूनों से खरोंचने और इसमें निहित उसकी उद्दाम काम भावना का वर्णन किया
है। वात्स्यायन का मत है कि कामवासना जब उफान पर होती है तो
स्त्री-पुरुष उत्तेजनावश एक-दूसरे को नोचने-खसोटने से बाज नहीं आते।
स्त्री की उत्तेजना और उसका लज्जाजनक स्वभाव उनके नाखूनों की तेज खरोंच
और गहरे दबाव से पता चल जाता है। पुरुष भी अधिक उत्तेजना में अपने
नाखूनों व दांतों का प्रयोग करता है।
संभोग जब उफान पर होता है और स्त्री-पुरुष चर्मोत्कर्ष की ओर बढ़
रहे होते हैं तो उनका एक-दूसरे में समा जाने का भाव बढ़ता चला जाता है।
नाखून एक-दूसरे के शरीर में धंसते चले जाते हैं। बाद में दोनों जब अपने इस
निशान को देखते हैं तो उनके अंदर फिर से काम वासना भड़क उठती है। प्रेम और
काम की बारंबारता के लिए ऐसे निशानों को आचार्य वात्स्यायन ने जरूरी कहा
है।
पुरुष और स्त्रियों द्वारा किन अंगों पर नाखून गड़ाने चाहिएँ-
* संभोग की तीव्र उत्तेजना के क्षण में स्त्रियां अक्सर पुरुष की पीठ पर अपने नाखून का निशान बनाती हैं। वह चरमोत्कर्ष के समय विह्वल हो उठती है और आनंदविभोर होकर पुरुष की पीठ, गर्दन, कंधे पर अपने नाखूनों को धंसाती चली जाती है। कान और होंठ पर भी वह नाखून व दांत का निशान बनाने से नहीं चूकती।
* वहीं वासनाग्रस्त पुरुष स्त्रियों के स्तन, स्तन के चुचूक, स्तनों के ऊपर की छाती, गर्दन, पेट, जांघ, नितंब, दोनों जांघों के जोड़, पेड़ू और कमर के चारों ओर नाखूनों के निशान बनाता है।
नख-क्षत का विधान-
* आचार्य वात्स्यायन का मत है कि प्रेम में हमेशा नयापन होना चाहिए ताकि प्रेम कभी पुराना न पड़े। एक-दूसरे के प्रति चाहत हमेशा बरकरार रहे। इसीलिए संभोग के क्षण में नित नए-नए प्रयोग करते रहना चाहिए। नख-क्षत व दांतों के काटने आदि का विधान प्रेम में नयापन लाता है।
* आचार्य का मत है कि परदेस यात्रा या लंबे समय के लिए बाहर जाने से पूर्व पुरुष-स्त्री गहरे संभोग में उतरें। उस वक्त पुरुष अपनी यादगार के रूप में स्त्री की जंघाओं, योनि व स्तनों पर तीव्र नाखून का खरोंच लगाना चाहिए। पति के जाने के बाद स्त्रियाँ जब अपने गुप्त स्थानों पर नाखूनों के निशान देखती हैं तब वह फिर से प्रेम से भर उठती हैं।
लंबे समय तक वियोग रहने के बाद भी ये निशान उन्हें उस रात की याद दिलाते हैं और उनका प्रेम एक बार फिर से नया हो उठता है। पत्र और आज के समय मोबाइल या फोन के जरिए दोनों उस रात और उस रात पड़े निशान की आपस में चर्चा कर फिर से उस गुदगुदी का अहसास कर सकते हैं, इससे दूरी भी नजदीकी में बदल जाती है। उनका स्पष्ट मत है कि यदि प्रेम की याद कराने वाला नख-क्षत नहीं होता तो बहुत समय के लिए बिछड़े हुए प्रेमियों के प्रेम में कमी आती चली जाएगी।
* यदि कोई अपरिचित स्त्री दूर से जब पियाप्यारी उस स्त्री के स्तनों के ऊपर छाती या होंठ पर ऐसे निशान देखती है तो वह समझ जाती है कि यह स्त्री अपने पिया की कितनी प्यारी होगी। हो सकता है उस स्त्री को देखकर उस अजनबी स्त्री के अंदर वासना भड़क उठे और वह भी अपने दांपत्य जीवन में प्रेम के नएपन की ओर अग्रसर हो।
* कोई युवती जब किसी पुरुष के छाती या पीठ पर नाखूनों के ऐसे निशान देखती है तो उसका मन भी चंचल हो उठता है और वह भी अपने प्रेम भरे जीवन में अनोखपन लाने को उतावला हो उठती है।
* आचार्य का स्पष्ट मत है कि वासना के भड़कने पर संभोग के क्षण में उसकी अभिव्यक्ति के लिए नाखूनों से खरोंचने और दांत गड़ाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। प्रेम का यह प्रकटिकरण स्त्री पुरुष को एक-दूसरे के बेहद नजदीक लाता है।
स्त्री-पुरुष किस तरह का नाखून रखें-
कामसूत्र में कहा गया है कि जिन स्त्री पुरुष की काम वासना तीव्र होती है, उन्हें अपने बाएं हाथ के नाखून नोकीले, ताजा कटे हुए, मैल रहित और फटे हुए नहीं होने चाहिए। संभोग का मजा तभी है, जब नाखून नोकीले, चिकने व चमकीले हों।
किस प्रदेश की स्त्रियों के नाखून होते हैं प्रेम के उपयुक्त
* आचार्य के अनुसार, गौड़ प्रांत अर्थात मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, गाजियाबाद एवं पूर्व प्रदेश बिहार, बंगाल आदि की महिलाओं के नाखून बड़े-बड़े, हाथ की शोभा बढाने वाले एवं देखने में मोहक होते हैं।
* दक्षिण भारतीय नारियों के नाखून छोटे, लेकिन गहरे घाव बनाने लायक होते हैं।
* महाराष्ट्र की स्त्रियों के नाखून मझोले होते हैं। महाराष्ट्र की महिलाएं संभोग के समय नखक्षत का प्रयोग खूब करती हैं।
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