Thursday 4 October 2012

80 साल की बुजुर्ग महिला के साथ यौन दुराचार

80 साल की बुजुर्ग महिला के साथ यौन दुराचार
नई दिल्ली: उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में पिछले साल 80 साल की बुजुर्ग महिला के साथ पार्क में करीब एक घंटे तक लकड़ी की छड़ी से यौन दुराचार के मामले से रेप की परिभाषा पर फिर से विचार करने का मुद्दा एक बार फिर उठा है। दिल दहला देने वाले इस मामले में कानूनी बाध्यताओं के चलते आरोपी युवक को आईपीसी की धारा -377 के तहत सिर्फ अप्राकृतिक दुराचार का दोषी ठहराया गया।

फैसला सुनाने के दौरान अडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ ने सरकार से रेप की परिभाषा बदलकर इसका दायरा बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल आईपीसी के सेक्शन 375 के अनुसार महिला की मर्जी के बिना उससे शारीरिक संबंध बनाने (सेक्शुअल ऑर्गन के पेनट्रेशन) को रेप माना जाता है।

मई 2011 में उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के त्रि नगर इलाके में कई सालों से पार्क में रह रही 80 साल की बुजुर्ग महिला के साथ एक युवक ने दुराचार किया था। इस मामले में पुलिस ने प्रह्लाद नाम के युवक को गिरफ्तार किया था।

अडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ की अदालत ने इस केस का जिक्र करते हुए कहा, ' यह एक बर्बर अपराध है, अपनी यौन उत्कंठा की पूर्ति के लिए पीड़िता के साथ जानवरों जैसा सलूक किया गया। ' सेशन कोर्ट ने कानून के जानकारों से कहा कि डिजिटल रेप, ओरल रेप, मेल रेप और ऐनल सेक्स को रेप की परिभाषा में शामिल करने पर विचार करने के लिए कहा। अदालत ने कहा इस केस ने हमारी आंखें खोलकर रख दी हैं।

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही योजना आयोग की समिति ने क्रिमिनल प्रोसिजर कोड को महिलाओं के लिए और आसान बनाए जाने की बात कही है। रेप की नई परिभाषा में सेक्सुअल पेनेट्रेशन में सेक्सुअल अंग के अलावा अंगुली डालना भी शामिल हो जाएगा। इसके बाद रेप की पुष्टि के लिए किए जाने वाले फिंगर टेस्ट को भी अपराध माना जाएगा, अगर वह पीड़ित से पूछे बिना किया जाता है। योजना आयोग की एक उच्च स्तरीय समिति ने रेप की शिकार हुई महिलाओं और बच्चों को और अधिक मानसिक प्रताड़ना से बचाने के लिए सुझाव दिया है कि रेप और यौन संबंध की पुष्टि के लिए किया जानेवाला उंगली परीक्षण (टू फिंगर टेस्ट) खत्म कर दिया जाए।

सेशन कोर्ट ने रेप की परिभाषा बदलने पर पुनर्विचार करने का मुद्दा इसलिए उठाया कि त्रीनगर रेप मामले में आरोपी प्रहलाद को अप्राकृतिक दुराचार, किडनैंपिग और हत्या के प्रयास का दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा दी गई और 17 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

पुलिस के मुताबिक, इस केस में बुजुर्ग पीड़िता घर-परिवार होने के बावजूद पार्क में रहने के लिए मजबूर थी क्योंकि बेटे और बहुएं उसे अपने साथ घर में नहीं रखते थे। पीड़िता खाने के लिए पार्क के आसपास रहने वाले लोगों की दया पर निर्भर थी। 22 मई 2011 को आधी रात करीब 2 बजे प्रह्लाद बुजुर्ग महिला को पास की झाड़ियों में घसीट कर ले गया और उसने लकड़ी की छड़ी से उसके साथ दुराचार किया। इसके बाद वह वहां से भाग गया। बाद में वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने महिला को अचेत और खून से लथपथ हालत में देखकर पास के हॉस्पिटल में भर्ती कराया और पुलिस को सूचित किया। होश में आने के बाद पीड़िता ने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। इस मामले में पुलिस ने 6 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया। परेड के दौरान महिला ने प्रह्लाद की शिनाख्त की।

कोर्ट में केस के ट्रायल के दौरान दिल्ली महिला आयोग के एक एडवोकेट ने यह कहा कि महिला को रेप पीड़ित के समान माना जाए। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान कानून इस बात की इजाजत नहीं देते, लेकिन कोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े कानूनी जानकारों से इस पर पुनर्विचार करने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा, 'रेप की परिभाषा का दायरा बढ़ाना आज वक्त की जरूरत है। आज जब छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ इस तरह के अपराध किए जा रहे हैं, तो अब वक्त है कि इस पर गंभीरता से विचार किया जाए।'

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